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1857 का प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम Detailed Notes

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भूमिका :

1857 की क्रांति जिसे “प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम” भी कहा जाता है, यह 10 मई , 1857 को मेरठ में शुरू हुआ जब भारतीय सैनिको ने ब्रिटिश अधिकारीयों के खिलाफ विद्रोह किया , और जल्द ही पुरे उतर भारत में फैल गया।

हालांकि विद्रोह अंततः अंग्रेजो द्वारा दबा दिया गया था, इसने ब्रिटिश शासन के खिलाफ भारतीय राष्ट्रवाद की भावना को जगाया

इसने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन को समाप्त कर दिया और भारत को सीधे ब्रिटिश ताज के अधीन कर दिया।

1857 के क्रांति के कारण :-

राजनीतिक कारण :-

लॉर्ड वेलेज्ली द्वारा 1798 में सहायक संधि तैयार की गई थी, जिसके तहत संधि करने वाले कई रियासतों को धीरे-धीरे ब्रिटिश सत्ता के अधीन कर लिया गया। जिसके कारण उन क्षेत्रों की जनता में काफी आक्रोश था।

लॉर्ड डलहौजी की “विलय नीति” (Doctrine of Lapse) के तहत कई भारतीय रियासतों को ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिया गया , जैसे की सतारा , झाँसी और नागपुर। इससे भारतीय शासकों में असंतोष और भय का माहौल बन गया।

1856 में लार्ड डलहौजी ने अवध को ब्रिटिश शासन में मिला लिया, और अवध के नवाब को कलकत्ता निष्कासित कर दिया गया। जिसके कारण अवध की जनता ब्रिटिश सत्ता के प्रतिशोध लेने के लिए तैयार थी।

तंजौर और कर्नाटक के नवाबों की राजकीय उपाधियां समाप्त कर दी गई।

नाना साहब बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र (गोद लिए पुत्र) थे, बाजीराव द्वितीय के मृत्यु के पश्चात डलहौजी ने नाना साहब को पेंशन देने से इंकार कर दिया। तथा उनको अपनी पैतृक राजधानी पूना से बहुत दूर, कानपुर में रहने को बाध्य किया।

आर्थिक कारण :

1750 ईसवीं के पश्चात् ब्रिटेन में औद्योगिक क्रांति सम्पन्न हुई। मैनचेस्टर, लिवरपूल आदि शहरों में कपड़ा उद्योग स्थापित हुए।

इंग्लैण्ड में भारतीय कपड़े को प्रतिबंधित किया गया एवं उनके आयात पर भारी कर लगाया गया। जिसके कारण एक तो भारतीय हथकरघा उद्योग नष्ट हुआ , इनमें संलग्न लाखों लोग बेकार हुये।

इंग्लैण्ड के उद्योगों को चलाने के लिए भारत से अधिक से अधिक कपास प्राप्त करने के लिए यहाँ के किसानों को कपास और नील की खेती हेतु बाध्य किया गया।

कृषक अपनी परंपरागत फसल गेहूं , चना , ज्वार , बाजरा आदि के स्थान पर कपास की खेती करने पर बाध्य हुये। इन सबका आक्रोश 1857 की क्रांति में उभरकर सामने आया।

सामाजिक कारण :

लार्ड विलियम बैंटिंग एवं डलहौजी ने भारत में कई सामाजिक सुधार किये। हिन्दू समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने के लिए कई कानून बनाये गए।

सती प्रथा , कन्या वध एवं बाल विवाह निरोधक कानून बनाये गये। विधवा पुनर्विवाह अधिनियम पारित किया गया। ये सामाजिक सुधार भारतीय समाज के हित में थे मगर भारतीयों ने इसे अंग्रेजों द्वारा सामाजिक जीवन में हस्तक्षेप माना

1835 ई. से अंग्रेजों द्वारा अंग्रेजीं शिक्षा के प्रसार को भारतीय पंडितों एवं मौलवियों ने अपने एकाधिकार पर अघात माना। और यह असामाजिक ज्वर 1857 की क्रांति में फुट गया।

धार्मिक कारण :

1813 ई. के चार्टर एक्ट ने ईसाई पादरियों को भारत आने की अनुमति प्रदान की और इनका एक ही उद्देश्य था भारत में ईसाई धर्म का प्रचार-प्रसार करना।

1850 में एक अधिनियम पारित किया गया जिसके अनुसार धर्म परिवर्तन करके ईसाई बनाने वालो को उनकी पैतृक सम्पति से वंचित नहीं किया जायेगा। जिससे भारतियों को विश्वास गया की अंग्रेज उन्हें सुनियोजित तरीके से ईसाई बनाने की कोशिश कर रहे है।

मेजर एडवर्डज् ने तो स्पष्टः कहा ही था कि – “भारत पर हमारे अधिकार का अंतिम उद्देश्य देश को ईसाई बनाना है। ”

सैनिक कारण :

भारतीय सैनिक जो समुद्र पार जाने का मतलब धर्म भ्रष्ट हो जाना मानते थे ,उन्हें जबरन समुद्र पार जाने को बाध्य किया गया।

सन् 1854 ई. में डाक अधिनियम पारित हुआ , इसके तहत सैनिकों की निःशुल्क डाक सुविधाएं समाप्त कर दी गई।

भारतीय सैनिक और अंग्रेज सैनिक के वेतन में काफी असमानता थी, और भारतीय सैनिक के पदोन्नति नहीं होती थी , जबकी अंग्रेजी सैनिक ऊंचे-ऊंचे पदों पर पहुंच जाते थे।

भारतीय को सेना में ऊंचे ऊंचा प्राप्त होने वाला पद सूबेदार का था।

तात्कालिक कारण :

विद्रोह की शुरुआत :-

1857 की क्रांति पर लिखी गई कुछ महत्वपूर्ण पुस्तकें :-

पुस्तक लेखक
सिविल रिबेलियन इन इंडियन म्यूटिनीस 1857-59 शशि भूषण चौधरी
द हिस्ट्री ऑफ़ द सिपॉय वॉर इन इंडिया जॉन विलियम काये
द फर्स्ट इंडियन वार ऑफ़ इंडिपेंडेंस 1857-59 कार्ल मार्क्स और फेडरिक एंजेल्स
द कॉजेज ऑफ़ द इंडियन रिवोल्ट (1858)सर सैयद अहमद खां
द सिपॉय म्यूटिनी ऑफ़ 1857 ए सोशल एनालिसिस एच. पी. चट्टोपाध्याय
1857 एस. एन. सेन
द इंडियन वार ऑफ़ इंडिपेंडेंस 1857 वी. डी. सावरकर
द पीजेंट एंड द राज एरिक थॉमस स्टोक्स
1857 द ग्रेट रिवोल्ट अशोक मेहता
द सिपॉय म्यूटिनी एंड रिवोल्ट ऑफ़ 1857 आर. सी. मजूमदार

1857 के विद्रोह के बारे में प्रमुख इतिहासकारों के मत :-

मत्त/विचार इतिहासकार
यह धर्मांधों का ईसाईयों के विरुद्ध एक धर्मयुद्ध थाएल. ई. आर. रीज
यह राष्ट्रीय विद्रोह था , न कि सिपाही विद्रोह बेंजामिन डिजरैली
1857 का विद्रोह न तो प्रथम था, न ही राष्ट्रीय था,और न ही यह स्वतंत्रता संग्राम थाआर. सी. मजूमदार
यह पूर्णतया देशभक्ति रहित और स्वार्थी सिपाही विद्रोह था।सीले
यह सभ्यता और बर्बरता के बीच संघर्ष था टी. आर. होम्स
1857 की क्रांति एक षडयंत्र थी आउट्रम टेलर

1857 के क्रांति के समय प्रमुख रियासतों के बारे में विशेष जानकारी :-

अवध :-

1801 में अवध पर सहायक संधि थोप दी गई।

1851 में लॉर्ड डलहौजी ने अवध के लिए कहा था की यह “चेरी” एक दिन हमारे मुँह में गिरेगा।

1856 में “राज्य हड़प नीति” के तहत डलहौजी ने अवध को ब्रिटिश शासन में मिला लिया।

11 फरवरी 1856 को अवध के अंतिम नवाब “वाजिद अलीशाह” पर कुशासन का आरोप लगाकर कलकत्ता के मटियाबुर्ज में निर्वासित कर दिया गया।

अवध से 1857 की क्रांति का नेतृत्व नवाब (वाजिद अलीशाह) की पत्नी बेगम हजरत महल ने किया था, क्योंकि उस समय उनका बेटा “विरजिस कादिर” नबालिक था।

बंगाल आर्मी में अधिक सिपाही अवध के ही थे , इसलिए अवध को “बंगाल आर्मी का पौधशाला” कहा जाता था।

क्रांति का दमन करने के लिए अवध में अंग्रेज अधिकारी हैवलाक और कैम्पवेल को भेंजा गया।

31 मार्च 1858 को लखनऊ पर अंग्रेजो का पुनः अधिकार हो गया।

झाँसी :-

झाँसी से 1857 की क्रांति का नेतृत्व रानी लक्ष्मीबाई ने किया था।

मई 1842 ई. में लक्ष्मीबाई का विवाह झाँसी के राजा गंगाधर राव से। हुआ।

1851 में उनका एक पुत्र हुआ , जो 3 माह की अल्प आयु में ही मर गया।

गंगाधर राव ने वासुदेव निवालकर के 4 वर्षीय पुत्र आनंद राव गोद लिया और उसका नाम दामोदर राव रखा।

21 नवंबर 1853 में गंगाधर राव की मृत्यु के बाद अंग्रेजों ने दत्तक पुत्र को राजा मानने से इंकार कर दिया ,और डलहौजी की हड़प निति के तहत झाँसी को ब्रिटिश राज्य में मिला लिया गया।

जब मेजर एलिस झाँसी पर अधिपत्य की सूचना लेकर रानी के पास पहुंचा तो रानी ने कहा – “मैं अपनी झाँसी नहीं दूंगी”

झाँसी से 1857 की क्रांति का नेतृत्व रानी लक्ष्मीबाई ने किया ,तीन महिलाएं -सुन्दर , मुंदर एवं काशीबाई रानी की कर्नल बनी।

3 अप्रैल 1858 ई. को ह्यूरोज ने झाँसी पर अधिकार कर लिया ,और रानी को भागकर कल्पी जाना पड़ा।

18 जून 1858 को ग्वालियर में अंग्रेजो से लड़ते हुए रानी की मृत्यु हो गई।

रानीलक्ष्मीबाई के घोड़े का नाम सारंगी और बादल था।

Note :- रानी लक्ष्मीबाई का जन्म 19 नवंबर 1835/1828 को काशी में हुआ , उनके पिता का नाम मोरोपंत और माता का नाम भागीरथी बाई था , उनका बचपन का नाम मनु , छबीली था और बाद में मणिकर्णिका के नाम से जानी गई।

बिहार :-

कुंवर सिंह आरा के पास जगदीशपुर के जमींदार थे।

कुंवर सिंह के भाई अमर सिंह एवं उनके मित्र निशान सिंह ने भी क्रांति में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

यहाँ 12 जून , 1857 को विद्रोह आरंभ हुआ था।

27 अप्रैल 1858 में कुंवर सिंह की मृत्यु हो गई।

जनरल वेन एवं टेलर ने दिसंबर 1858 तक विद्रोह का दमन कर दिया।

कानपुर :-

पूना में अंतिम पेशवा बाजीराव द्वितीय थे , अंग्रेजों ने इनका पेशवा पद छीनकर इन्हें 8 लाख रुपये वार्षिक पेंशन एवं अपनी मनपसंद जगह रहने का विकल्प दिया।

बाजीराव द्वितीय बिठूर (कानपुर) में गंगा किनारे रहते थे।

बाजीराव द्वितीय का कोई पुत्र नहीं था, इसलिए उन्होंने माधवनरायण भट्ट के तीन वर्षीय पुत्र गोविन्द को गोद लिया और उसका नाम धुंडिराज रखा , जो अपने उपनाम नाना साहब के नाम से जाना जाता। था।

बाजीराव द्वितीय की मृत्यु के पश्चात डलहौजी ने उनके गोद लिए पुत्र नाना साहब को पेंशन देने से इंकार कर दिया।

नाना साहब ने अपने प्रतिनिधि अजीमुल्ला खां को पेंशन की अपील करने के लिए इंग्लैंड भेंजा , लेकिन बात नहीं बानी।

कानपुर में विद्रोह की शुरुआत 5 जून 1857 को हुई, और इसका नेतृत्व नाना साहब ने किया था।

कानपुर में विद्रोह का दमन कैम्पबेल ने 6 सितम्बर 1857 ई. को कर दिया गया।

दिल्ली :-

1857 ई. की क्रांति के प्रमुख केंद्र :-

केंद्र भारतीय नायक विद्रोह की तिथि दमनकर्ता विद्रोह दबाने की तिथि
दिल्ली बहादुरशाह जफ़र , बख्त खां (सैन्य नेतृत्व)11 ,12 मई , 1857 ई. निकलसन (मारा गया) एवं हडसन 21 सितम्बर , 1857 ई
कानपुर नाना साहब (धुन्धु पंत) ,तात्या टोपे (सैन्य नेतृत्व)5 जून ,1857 ई कैम्पबेल 6 सितम्बर , 1857 ई
लखनऊ बेगम हजरत महल (मुहम्मदी खातुन)4 जून ,1857 ई.हेनरी लॉरेंस (मारा गया) कैम्पबेलमार्च ,1858 ई
झाँसी रानी लक्ष्मीबाई जून ,1857 ई.ह्यूरोज 3 अप्रैल , 1858 ई
इलाहाबाद लियाकत अली 1857 ई.कर्नल नील 1858 ई
जगदीशपुर कुंवर सिंह अगस्त , 1857 ई.विलियम टेलर एवं विंसेट आयर 1858 ई
बरेली खान बहादुर खां 1857 ई.हडसन 1858 ई
फ़ैजाबाद मौलवी अहमद उल्ला 1857 ई.कर्नल नील 1858 ई
फतेहपुर अजीमुल्ला 1857 ई.जेनरल रेनर्ड1858 ई

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