असम के 16 वर्षीय मयंक चक्रवर्ती मार्च 2026 में पूर्वोत्तर भारत के पहले ग्रैंडमास्टर (GM) तथा भारत के 94वें ग्रैंडमास्टर बने।
यह उपलब्धि इस क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक है , क्योंकि इससे पहले पूर्वोत्तर भारत से कोई भी खिलाड़ी ग्रैंडमास्टर नहीं बना था।
प्रमुख बिंदु :
- उन्होंने स्टॉकहोम में एक अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट में अपना तीसरा और अंतिम GM नॉर्म हासिल किया और FIDE द्वारा निर्धारित सभी आवश्यकताओं को पूरा किया।
- उनकी यह उपलब्धि भारत के तेजी से बढ़ते ग्रैंडमास्टरों की सूची में एक और अध्याय जोड़ती है, जो वैश्विक शतरंज में देश की बढ़ती प्रतिष्ठा को दर्शाती है।
- मयंक चक्रवर्ती का जन्म असम के गुवाहाटी में हुआ। मयंक ने शतरंज में शुरूआती प्रतिभा दिखाई और राष्ट्रिय और अंतरराष्ट्रीय युवा चैम्पियनशिप में आगे बढ़े।
- इससे पहले उन्होंने इंटरनेशनल मास्टर (IM) की उपाधि अर्जित की थी , जो ग्रैंडमास्टर (GM) की उपाधि प्राप्त करने की दिशा में एक आवश्यक कदम है।
ग्रैंडमास्टर बनने का मतलब क्या होता है ?
शतरंज में Grandmaster (GM) सबसे ऊँचा खिताब होता है, जिसे FIDE (Federation Internationale des Echecs – World Chess Federation) द्वारा दिया जाता है।
इस खिताब को पाने के लिए खिलाड़ी को :–
- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतरीन प्रदर्शन करना होता है।
- कम से कम 3 GM norms हासिल करने होते हैं।
- 2500 या उससे अधिक की FIDE rating प्राप्त करनी होती है।