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कंकाल तंत्र (Skeletal System)

कंकाल तंत्र (Skeletal System)

वैसा तंत्र जो किसी भी जीव को निश्चित आधार एवं आकार प्रदान करता है , उसे कंकाल तंत्र कहा जाता है।

Skeletal System
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कंकाल के द्वारा शरीर के ढाँचे का निर्माण होता है।

शरीर के ढाँचे के निर्माण के अलावा इस तंत्र के द्वारा कई महत्वपूर्ण कार्यों को किया जाता है, जो निम्नलिखित है।

(i) शरीर को गति प्रदान करना।

(ii) महत्वपूर्ण अंगों की सुरक्षा करना।

(iii) कुछ महत्वपूर्ण कोशिकाओं का निर्माण करना।

(iv) कुछ पदार्थों को जमा करके रखना। जैसे – कैल्शियम एवं फास्फोरस।

कंकाल तंत्र का अध्ययन ऑस्टियोलॉजी (Osteology ) कहलाता है।

अस्थि में पाई जाने वाली कोशिकाएँ आस्टियोब्लास्ट (Osteoblast) कहलाती है।

मानव कंकाल तंत्र

मानव कंकाल तंत्र को दो भागों में बाँटा जाता है

1. बाह्य कंकाल तंत्र (Exo-Skeletal System )

कंकाल तंत्र का वह भाग जो शरीर के बाहरी भागों में मौजूद होता है, उसे बाह्य कंकाल तंत्र कहा जाता है। जैसे :- बाल , नाख़ून , खुर , त्वचा , सिंघ आदि।

यह अत्यधिक कठोर होता है तथा शरीर को रक्षा प्रदान करता है।

वैसे जीव जिनमे बाह्य कंकाल तंत्र होता है :- केंकड़ा , तेलचट्टा , मकड़ी , घोंघा , चींटी , बिच्छु , शंख आदि।

यह मृत कोशिकाओं का बना होता है।

इसमें रक्त संचार नहीं होता है।

यह केराटिन प्रोटीन के बने होते हैं । केराटिन प्रोटिन एक जलरोधी प्रोटिन है जिसके द्वारा शरीर को जल से सुरक्षा प्रदान होती है।

2. अंतः कंकाल तंत्र (Endoskeletal System )

शरीर के आंतरिक ढाँचे का निर्माण करने वाले कंकाल को अंतः कंकाल तंत्र कहा जाता है। जैसे :- खोपड़ी , मेरुदंड , पसलियाँ आदि।

वैसे जीव जिनमे अंतः कंकाल तंत्र होता है :- मानव , बकरी , गाय , कुत्ता आदि।

Note :- कछुआ के पीठ पर बाह्य कंकाल तथा पैर एवं पूँछ में अंतः कंकाल होता है।

अंतः कंकाल तंत्र दो प्रकार के होते हैं।

(A)उपास्थि (Cartilage)

यह मुलायम होता है क्योंकि इसमें केवल कैल्सियम फास्फेट [Ca3(PO4)2 होता है। इसमें कैल्सियम कार्बोनेट (CaCO3 ) नहीं पाया जाता है।

उपास्थि में कॉन्ड्रिन प्रोटीन पाया जाता है।

उपास्थियों में तंत्रिका तंत्र एवं रक्तनलिका नहीं होती है लेकिन भोजन और ऑक्सिजन की आपूर्ति लसिका के द्वारा होती है।

नाक , कान तथा सभी बड़ी हड्डियों के सिरे पर उपास्थि पाया जाता है।

Cartilage

(B) अस्थि (Bone)

यह कठोर होता है, क्योंकि इसमें कैल्सियम फास्फेट (60 %) तथा कैल्सियम कार्बोनेट (40 %) दोनों होता है।

हड्डियों में सर्वाधिक मात्रा में पाया जाने वाला तत्व कैल्शियम है , जिसकी मात्रा लगभग 98 % होती है।

Strontium 90 (Sr-90) , कैल्शियम की तरह व्यवहार करता है , जो हड्डियों पर जाकर जमा हो जाता है। इसके जमाव के कारण Bone Marrow की कोशिकाएं सक्रीय हो जाती है , जिससे बहुत अधिक संख्या में WBC का निर्माण होने लगता है। परिणामस्वरुप Leukemia (Blood Cancer) होता है।

अस्थियों के लिए आवश्यक विटामिन D और K है। विटामिन D मजबूती प्रदान करता है तथा विटामिन K अस्थियों के निर्माण में सहायता करता है।

विटामिन D (Calciferol) हड्डियों पर कैल्शियम के जमाव में मदद करता है।

विटामिन D (Calciferol) की कमी हो जाने पर हड्डियों में कैल्शियम की कमी हो जाती है , जिससे बच्चों में Rickets तथा बुजुर्गों में Osteamalacia या Osteoporosis नामक बीमारी होती है।

कैल्शियम की कमी से हड्डियाँ कमजोर हो जाती है , जिससे बच्चों में Rickets तथा बुजुर्गों में Osteamalacia या Osteoporosis नामक बीमारी होती है।

अस्थियों में ओसीन प्रोटीन पाया जाता है।

अस्थियों में तंत्रिका तंत्र और रक्त नलिकाएं पाई जाती है।

जन्म के समय मनुष्य में / नवजात बच्चों में अस्थियों की संख्या 270 – 310 के बीच होती है अर्थात जन्म के समय औसत अस्थियों की संख्या 300 होती है।

बाल्यावस्था में / बच्चों में अस्थियों की संख्या 208 होती है।

बच्चों की हड्डियों में दरारें पाई जाती हैं , जो Ca ( कैल्सियम ) के जमाव के कारण उम्र बढ़ने के साथ – साथ भरती रहती है , जिससे वयस्क अवस्था में हड्डियों की संख्या में कमी आ जाती है।

वयस्क मानव के शरीर में हड्डियों (अस्थियों ) की संख्या 206 होती है।

अस्थि को दो भागों में बाँटा गया है।

(a)उपांगी कंकाल (Appendicular Skeleton)

यह शरीर को सीधा रखने तथा गति प्रदान करने में सहायता करता है। इसकी संख्या 126 होती है।

(i) हाथ (hand )

एक हाथ में कुल 30 अस्थियाँ पाई जाती है अतः दोनों हाथों में कुल 60 अस्थियाँ पाई जाती है।

Hand
Hand bone
(ii) टाँग (Leg )

एकटाँग में कुल 30 अस्थियाँ पाई जाती है अतः दोनों टाँगों में कुल 60 अस्थियाँ पाई जाती है।

Leg

तलवे की हड्डी को मेटाटार्सल कहते है।

Leg bone
(iii) Pectoral Bone

(क) क्लैविकल (Clavicle ) (हंसली ) – दोनों हाथों के पास कुल 2 हंसली होती है।

(ख) स्कैपुला (Scapula ) (अंश मेखला ) – दोनों हाथों के पास कुल 2 स्कैपुला होती है।

(iv) Pelvic Girdle (श्रेणी मेखला )

इसमें 2 अस्थियाँ होती है तथा प्रत्येक अस्थि के 3 भाग (Ilium, Pubis, Ischium ) होते हैं।

Hip bone
(b) अक्षीय कंकाल (Axial Skeleton )

यह शरीर के अंदर कोमल अंगों की रक्षा करता है। इसकी संख्या 80 होती है।

(i) Head (सिर )

सिर में 29 हडियाँ होती है।

कपाल – 8 , चेहरा – 14 , कान – 6 , कंठ – 1

(क) खोपड़ी (Skull )

यह गर्दन के ऊपर स्थित सिर (Head ) का कंकाल है।

इसका ऊपरी भाग दृढ़तापूर्वक स्थाई रूप से जुड़ी हुई 8 अस्थिओं का बना हुआ एक बॉक्स होता है जिसे कपाल (Cranium ) कहते है। मानव का मस्तिष्क इसी के भीतर सुरक्षित रहता है।

खोपड़ी के शेष भाग में ऊपरी एवं निचे के जबड़े (jaws ) सहित 14 आस्थियाँ होती है। जो चेहरे का निर्माण करती है।

अतः खोपड़ी में 22 अस्थियाँ होती है।

(ख) कान

प्रत्येक कान के भीतरी भाग में तीन – तीन आस्थियाँ (मलयस , इन्कस , स्टेप्स ) होती है।

दोनों कान में कुल 6 अस्थियाँ होती है।

Ear

(ग) Hyoid Bone

कंठ में 1 अस्थि होती है , जिसे कण्ठिका अस्थि (Hyoid Bone ) कहते है।

(ii) मेरुदण्ड/कशेरुक दंड (Vertebral Column )

मेरुदण्ड को रीढ़ (Backbone ) भी कहते हैं ।

यह ऊपर गर्दन से लेकर नीचे पुच्छ – अस्थि (Tail bone ) तक फैला हुआ 33 अस्थियों का स्तम्भ होता है जिसकी प्रत्येक अस्थि को कशेरुका (Vertebra ) कहते हैं।

गर्भ में रीढ़ में अस्थियों की संख्या 33 होती है लेकिन बड़ा होने पर घटकर 26 हो जाती है।

1st कशेरुकी का नाम – Atlas (एटलस)

2nd कशेरुकी का नाम – Axis (एक्सिस)

अंतिम कशेरुकी का नाम – Coccyx (कोक्सीक्स)

इसे पाँच भागों में बाँटा जा सकता है।

भ्रूण में अस्थियों की संख्या शिशु में अस्थियों की संख्या
1. गर्दन (Cervical )7 कशेरुक 7 कशेरुक
2. वक्ष (Thoracic )12 कशेरुक 12 कशेरुक
3. कटि (Lumber )5 कशेरुक 5 कशेरुक
4. त्रिक (Sacral )5 कशेरुक 1 कशेरुक
5. अनुत्रिकास्थि (Coccyx )4 कशेरुक 1 कशेरुक
योग 33 26
Backbone
(iii) Ribs (पसली )

पसली में कुल 24 (12 जोड़ी ) अस्थियाँ होती है।

  • सत्य पसली (7 Pairs ) – Sternum से जो पसली Direct जुड़ी हो, उसे सत्य पसली कहते है।
  • असत्य पसली (5 Pairs ) – जो Sternum के एक बिंदु से जुड़ी होती है, उसे असत्य पसली कहते है।
  • तैरती हुई पसली (Floating ribs ) – 11th , 12th जोड़ी पसली।
(iv) Sternum (स्टरनम)

इसकी संख्या 1 होती है, जो पसलियों को जोड़ कर रखती है।

Ribs
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Tendon (टेंडन / कण्डरा )

यह एक प्रकार का संयोजी ऊतक है , जो हड्डियों को मांसपेशियों से जोड़ता है।

इसमें प्रचुर मात्रा में सफेद फाइबर पाया जाता है।

Ligaments (लिगामेंट्स / स्नायुबंधन )

यह एक प्रकार का संयोजी ऊतक है , जो हड्डी को हड्डी से जोड़ता है।

tendon_ligament

Bone Marrow (अस्थिमज्जा )

अस्थियों के बीच में उपस्थित जालीनुमा आकृति को अस्थिमज्जा कहते है।

RBC , WBC तथा प्लेटलेट्स का निर्माण अस्थिमज्जा में होता है।

संधि (Joints)

कंकाल का वह स्थान जहाँ अस्थियाँ मिलकर हिल – डुल सकती है , संधि कहलाता है।

संधि वाले स्थान पर एक गुहा (खली जगह ) पाया जाता है , जिसे साइनोबियल गुहा कहते है।

अस्थियों के जोड़ के पास जोड़ को मुलायम रखने के लिए साइनोबियल नामक द्रव पाया जाता है।

हमारे शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ने से साइनोबियल द्रव घट जाती है , जिससे गठिया नामक बिमारी हो जाती है।

संधि (जोड़ों )का अध्ययन Arthrology (आर्थ्रोलॉजी ) कहलाता है।

अस्थियों में तीन प्रकार की संधि पाई जाती है।

(A) अचल संधि (Immovable Joints)

इस प्रकार के संधि में अस्थियाँ थोड़ा सा भी गति नहीं करती है।

यह संधि खोपड़ी तथा दाँत में पाया जाता है।

खोपड़ी में जबड़े की अस्थि को छोड़कर सभी में अचल संधि होती है।

(B) अपूर्ण संधि (Slightly movable Joints)

यह संधि जहाँ पाई जाती है वहाँ थोड़ा – मोड़ा गति देखने को मिलता है। जैसे – पसली , कशेरुक दण्ड , नाक

(C) पूर्ण संधि (Freely Movable Joints)

यह संधि अस्थियों को विभिन्न दिशा में गति प्रदान करता है

पूर्ण संधि 5 प्रकार की होती है।

(i) कन्दुक खलिका (Ball and Socket)

इस प्रकार के संधि में एक गुहा होता है तथा जो हड्डी इससे जुड़ती है उसका ऊपरी भाग गोल होता है यह सभी दिशाओं में घूम सकता है।

जैसे – पेल्विक + फिमर (कूल्हे का जोड़ ) ; स्कैपुला + ह्यूमरस (कंधे का जोड़ )

(ii) कब्जा संधि (Hinge Joints )

यह संधि केवल एक ही ओर गति करने की अनुमति देती है। जैसे – केहुनी (Elbow) , घुटना (Knee) , अंगुली (Fingers)

(iii) खूँटी संधि (Pivot Joints)

इसका आकार खूँटी के समान होता है। यह एक दूसरे के ऊपर रखी हुई रहती है। जैसे – कशेरुक दण्ड की ऊपरी अस्थि (एटलस)

(iv) Plane Gliding Joints

यह एक दूसरे पर फिसलती है और थोड़ा गति प्रदान करती है। जैसे – कार्पल , टार्सल

(v) Saddle Joints

यह Ball and Socket Joints के समान ही होता है, किन्तु यह एक निश्चित सिमा के अंदर ही सभी दिशा में गति करता है। जैसे – अंगूठा

कंकाल पेशी

मांसपेशियों में थकान लैक्टिक अम्ल के जमाव के कारण होता है।

मानव में द्विशिरस्क मांसपेशियां हाथ में स्थित होती है।

मांसपेशियों का वह भाग जो संकुचन उत्पन्न करने के लिए सिकुड़ता है , उसे एक्टिन कहते है।

अन्य

शरीर की सबसे छोटी अस्थि स्टेप्स है। यह मध्य कान की अस्थि है।

शरीर की सबसे बड़ी / लम्बी अस्थि फीमर (ऊरु ) अस्थि है। यह जांघ की अस्थि है।

शरीर की सबसे कमजोर अस्थि क्लैविकल (हंसली ) है।

शरीर की सबसे मजबूत अस्थि मेंडिबल [निचले जबड़े की अस्थि (Jaw -Bone )] है।

शरीर की सबसे पतली अस्थि Lacrimal Bone (नेत्र अस्थि ) है।

शरीर की सबसे चमकीली अस्थि टिबिया है।

टिबिया एवं फिबुला को Calf Bones(बछड़े की हड्डी) कहा जाता है।

Jointless bone कौन है। – Hyoid Bone

पटेला सीसमाइड Bone का बना होता है। सीसमाइड Bone , उपास्थि (Cartilage) का ही कठोर रूप होता है।

जब हम बैठते है, तो इस्कियम नामक हड्डी (अस्थि ) पर जोर पड़ता है , जो पेल्विक का एक भाग है।

खोपड़ी के आधार में एक बड़ा छेद होता है , जिसे Foramen Magnem (फोरमेन मैग्नम ) कहते है। यह कपाल गुहा और कशेरुक नलिका के बीच संचार का रास्ता है। इसी के जरिए रीढ़ की हड्डी , तंत्रिकाएं और रक्त वाहिकाएँ गुजरती है। यह मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी को जोड़ता है।

लिखते समय 8 हड्डी का उपयोग होता है।

हमारे कानों में उपास्थियों की उपस्थिति के कारण ही उसे आसानी से मोड़ा जा सकता है।

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