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ऑफबाउ सिद्धांत , कोर इलेक्ट्रॉन , संयोजी इलेक्ट्रॉन , संयोजकता , आयन-धनायन एवं ऋणायन (Aufbau Principle) {CheL2ThdP1}

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इस सिद्धांत के अनुसार इलेक्ट्रॉन सबसे पहले कम ऊर्जा वाले कक्षक में प्रवेश करता है इसके बाद उससे अधिक और इसी क्रम में भरते चले जाते हैं। अर्थात एक उच्च ऊर्जा वाला कक्षक तब तक नहीं भरा जाता है जब तक कि उससे कम ऊर्जा वाला कक्षक पूरी तरह से भर नहीं जाता।

यह सिद्धांत परमाणुओं के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास को निर्धारित करने में मदत करता है।

ऑफबाउ आरेख :- ऑफबाउ आरेख कक्षकों को भरने के क्रम को दर्शाने के लिए एक सामान्य तरीका है।

Aufbau Graph parmanu principle
Aufbau Graph parmanu principle

उपकक्षा (Subshell or Sub Orbit) में ऊर्जा का बढ़ता क्रम :- 1s < 2s < 2p < 3s < 3p < 4s < 3d < 4p < 5s ………………

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electron configuration / electronic vinyas

1. हाइड्रोजन ⟶ H ⟶ 1 ⇒ 1s1

2. हीलियम ⟶ He ⟶ 2 ⇒ 1s2

3. लिथियम ⟶ Li ⟶ 3 ⇒ 1s2 , 2s1

4. बेरिलियम ⟶ Be ⟶ 4 ⇒ 1s2 , 2s2

5. बोरॉन ⟶ B ⟶ 5 ⇒ 1s2 , 2s2 , 2p1

6. कार्बन ⟶ C ⟶ 6 ⇒ 1s2 , 2s2 , 2p2

7. नाइट्रोजन ⟶ N ⟶ 7 ⇒ 1s2 , 2s2 , 2p3

8. ऑक्सीजन ⟶ O ⟶ 8 ⇒ 1s2 , 2s2 , 2p4

9. फ्लोरीन ⟶ F ⟶ 9 ⇒1s2 , 2s2 , 2p5

10. निऑन ⟶ Ne ⟶ 10 ⇒ 1s2 , 2s2 , 2p6

11. सोडियम ⟶ Na ⟶ 11 ⇒ 1s2 , 2s2 , 2p6 , 3s1

12. मैग्नीशियम ⟶ Mg ⟶ 12 ⇒ 1s2 , 2s2 , 2p6 , 3s2

13. ऐलुमिनियम ⟶ Al ⟶ 13 ⇒ 1s2 , 2s2 , 2p6 , 3s2 3p1

14. सिलिकॉन ⟶ Si ⟶ 14 ⇒ 1s2 , 2s2 , 2p6 , 3s2 3p2

15. फॉस्फोरस ⟶ P ⟶ 15 ⇒ 1s2 , 2s2 , 2p6 , 3s2 3p3

16. सल्फर (गंधक) ⟶ S ⟶ 16 ⇒ 1s2 , 2s2 , 2p6 , 3s2 3p4

17. क्लोरीन ⟶ Cl ⟶ 17 ⇒ 1s2 , 2s2 , 2p6 , 3s2 3p5

18. आर्गन ⟶ Ar ⟶ 18 ⇒ 1s2 , 2s2 , 2p6 , 3s2 3p6

19. पोटैशियम ⟶ K ⟶ 19 ⇒ 1s2 , 2s2 , 2p6 , 3s2 3p6 , 4s1

20. कैल्सियम ⟶ Ca ⟶ 20 ⇒ 1s2 , 2s2 , 2p6 , 3s2 3p6 , 4s2

See More (और अधिक देखें)

21. स्कैंडियम ⟶ Sc ⟶ 21 ⇒ 1s2 , 2s2 , 2p6 , 3s2 3p6 , 4s2 , 3d1

22. टाइटेनियम ⟶ Ti ⟶ 22 ⇒ 1s2 , 2s2 , 2p6 , 3s2 3p6 , 4s2 , 3d2

23. वैनेडियम ⟶ V ⟶ 23 ⇒ 1s2 , 2s2 , 2p6 , 3s2 3p6 , 4s2 , 3d3

24. क्रोमियम ⟶ Cr ⟶ 24 ⇒ 1s2 , 2s2 , 2p6 , 3s2 3p6 , 4s1 , 3d5

25. मैंगनीज ⟶ Mn ⟶ 25 ⇒ 1s2 , 2s2 , 2p6 , 3s2 3p6 , 4s2 , 3d5

26. आयरन (लोहा) ⟶ Fe ⟶ 26 ⇒ 1s2 , 2s2 , 2p6 , 3s2 3p6 , 4s2 , 3d6

27. कोबाल्ट ⟶ Co ⟶ 27 ⇒ 1s2 , 2s2 , 2p6 , 3s2 3p6 , 4s2 , 3d7

28. निकेल ⟶ Ni ⟶ 28 ⇒ 1s2 , 2s2 , 2p6 , 3s2 3p6 , 4s2 , 3d8

29. कॉपर (ताँबा) ⟶ Cu ⟶ 29 ⇒ 1s2 , 2s2 , 2p6 , 3s2 3p6 , 4s1 , 3d10

30. जिंक (जस्ता) ⟶ Zn ⟶ 30 ⇒ 1s2 , 2s2 , 2p6 , 3s2 3p6 , 4s2 , 3d10

31. गैलियम ⟶ Ga ⟶ 31 ⇒

32. जर्मेनियम ⟶ Ge ⟶ 32 ⇒

33. आर्सेनिक ⟶ As ⟶ 33 ⇒

34. सेलेनियम ⟶ Se ⟶ 34 ⇒

35. ब्रोमीन ⟶ Br ⟶ 35 ⇒

36. क्रिप्टन ⟶ Kr ⟶ 36 ⇒

37. रूबिडियम ⟶ Rb ⟶ 37 ⇒

38. स्ट्रॉन्शियम ⟶ Sr ⟶ 38 ⇒

39. यिट्रियम ⟶ Y ⟶ 39 ⇒

40. जिरकोनियम ⟶ Zr ⟶ 40 ⇒

41. निओबियम ⟶ Nb ⟶ 41 ⇒

42. मॉलिब्डेनम ⟶ Mo ⟶ 42 ⇒

43. टेक्निशियम ⟶ Tc ⟶ 43 ⇒

44. रुथेनियम ⟶ Ru ⟶ 44 ⇒

45. रोडियम ⟶ Rh ⟶ 45 ⇒

46. पैलेडियम ⟶ Pd ⟶ 46 ⇒

47. सिल्वर (चाँदी) ⟶ Ag ⟶ 47 ⇒

48. कैडमियम ⟶ Cd ⟶ 48 ⇒

49. इंडियम ⟶ In ⟶ 49 ⇒

50. टिन ⟶ Sn ⟶ 50 ⇒

51. ऐंटीमनी ⟶ Sb ⟶ 51 ⇒

किसी परमाणु के बाह्यतम कक्षा के अंदर वाली कक्षाओं में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की कुल संख्या को कोर इलेक्ट्रॉन (Core Electron) कहते है।

किसी परमाणु के बाह्यतम कक्षा में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की कुल संख्या को संयोजी इलेक्ट्रॉन (Valence Electron) कहते है।

संयोजी इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा अन्य इलेक्ट्रॉन की अपेक्षा अधिक होती है यही कारण है की किसी रासायनिक अभिक्रिया में संयोजी इलेक्ट्रॉन ही भाग लेते हैं।

संयोजी इलेक्ट्रॉन की संख्या 1 से 8 तक होती है।

हीलियम को छोड़कर अन्य सभी अक्रिय गैसों के बाह्यतम कक्षा में 8 इलेक्ट्रॉन होते हैं , लेकिन हीलियम के बाह्यतम कक्षा में 2 ही इलेक्ट्रॉन होते हैं।

किसी तत्व की संयोजकता (Valency) उसके संयोजी इलेक्ट्रॉन (Valence Electron) की सहायता से ज्ञात की जा सकती है।

  • Case – 1 :- यदि किसी परमाणु के बाह्यतम कक्षा में 1 , 2 , 3 या 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं तो संयोजकता संयोजी इलेक्ट्रॉन (Valence Electron) के बराबर होती है।
संयोजकता (Valency) = संयोजी इलेक्ट्रॉन (Valence Electron) की संख्या
  • Case – 2 :- यदि किसी परमाणु के बाह्यतम कक्षा में 5 , 6 या 7 इलेक्ट्रॉन होते हैं तो संयोजकता 8 – संयोजी इलेक्ट्रॉन (Valence Electron) के बराबर होती है।
संयोजकता (Valency) = 8 – संयोजी इलेक्ट्रॉन (Valence Electron) की संख्या

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जब कोई परमाणु या अणु इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है या इलेक्ट्रॉन का त्याग करता है तो उसपर ऋण आवेश या धन आवेश आ जाता है। ऋण आवेश या धन आवेश वाले परमाणु या अणु को आयन कहते हैं।

आयन दो प्रकार का होता है।

जब कोई परमाणु या अणु एक या एक से अधिक इलेक्ट्रॉन का त्याग कर देता है , तो इलेक्ट्रॉन की संख्या प्रोट्रोन से कम हो जाती है , जिसके परिणामस्वरूप उसपर शुद्ध धन आवेश आ जाता है। इस प्रकार आवेशित परमाणु या अणु को धनायन कहते हैं।

जैसे :- Na+ , Zn2+ , K+ , Ca2+ , H+ , Al3+

जब कोई परमाणु या अणु एक या एक से अधिक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है , तो इलेक्ट्रॉन की संख्या प्रोट्रोन से अधिक हो जाती है , जिसके परिणामस्वरूप उसपर शुद्ध ऋण आवेश आ जाता है। इस प्रकार आवेशित परमाणु या अणु को ऋणायन कहते हैं।

जैसे :- Cl , SO42- , NO3 , O2-

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