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संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना 24 अक्टूबर, 1945 ई. को हुई।
Full form
- UN :- United Nation (संयुक्त राष्ट्र)
- UNO :- United Nation Organization (संयुक्त राष्ट्र संघ)
- UNA :- United Nation Association (संयुक्त राष्ट्र संघ)
संयुक्त राष्ट्र अथवा यूनाइटेड नेशन का नाम अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति फ्रैंकलीन डी. रुजवेल्ट द्वारा प्रदान किया गया।
संयुक्त राष्ट्र संघ के संस्थापक सदस्य देशों की संख्या 51 थी। 26 जून, 1945 को अधिकार-पत्र पर तो केवल 50 राष्ट्रों के प्रतिनिधियों ने हस्ताक्षर किए थे। बाद में इस पर हस्ताक्षर कर पोलैंड 51 वां संस्थापक सदस्य देश बना था।
वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र संघ के सदस्य देशों की संख्या 193 है (193वां देश …… दक्षिणी सूडान )।

नोट :- रामास्वामी मुदालियर ने भारतीय प्रतिनिधि मंडल का नेतृत्व किया था तथा संस्थापक सदस्य के रूप में भारत की ओर से संयुक्त राष्ट्र चार्टर पर हस्ताक्षर किए थे।
भारत में संयुक्त राष्ट्र के कुल 26 संगठन है।
संयुक्त राष्ट्र संघ का मुख्यालय न्यूयॉर्क शहर (USA) में स्थित है। इसका भवन 17 एकड़ जमीन पर 39 मंजिल का है, जो मैनहट्ट्न द्वीप में बना है।
यह 17 एकड़ भूमि जॉन डी रॉकफेलर ने दान में दी थी। इसी में इसका सचिवालय है।
संघ का मुख्य कार्यालय 1952 ई. में बनकर तैयार हुआ। यहाँ इसकी महासभा की प्रथम बैठक अक्टूबर, 1952 ई. में आयोजित की गयी।
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संयुक्त राष्ट्र संघ का ध्वज :-
संयुक्त राष्ट्र संघ के ध्वज की पृष्ठभूमि हल्की नीली है और उस पर श्वेत रंग से राष्ट्र संघ का प्रतीक बना है। यह प्रतीक है, दो जैतून की वक्राकार शाखाएँ जो ऊपर से खुली हैं और उनके बीच विश्व का मानचित्र बना है।

संयुक्त राष्ट्र संघ की भाषाएँ :-
संयुक्त राष्ट्र संघ की भाषाएँ :- कार्य करने वाली भाषा दो हैं …. अंग्रेजी और फ्रेंच।
अन्य भाषाएँ जिन्हें राष्ट्र संघ की मान्यता प्राप्त हैं ……चीनी, रसियन, अऱबी तथा स्पेनिश।
संयुक्त राष्ट्र संघ का बजट :-
संयुक्त राष्ट्र घोषणा पत्र के अनुच्छेद 17 के अनुसार बजट पर विचार करने एवं उसे अनुमोदित करने की जिम्मेवारी महासभा की है। इसका नियमित बजट महासभा द्वारा हर दूसरे वर्ष अनुमोदित किया जाता है।
बजट महासचिव द्वारा पेश किया जाता है।
संयुक्त राष्ट्र संघ के अंग :- इसके निम्न छह अंग हैं।
- महासभा (General Assembly)
- सुरक्षा परिषद (Security Council)
- आर्थिक व सामाजिक परिषद (Economic and Social Council)
- प्रन्यास परिषद(Trusteeship)
- अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय(International Court Of Justice)
- सचिवालय (Secretariat)
नोट :- अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय का मुख्यालय हेग (नीदरलैंड ) में है। इसके अतिरिक्त सभी 5 अंग का मुख्यालय न्यूयार्क (USA ) में स्थित है।
1. महासभा
इसमें सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधि सम्मिलित होते हैं। इसलिए इसे विश्व की लघु संसद भी कहा गया है।
प्रत्येक देश इसमें पाँच प्रतिनिधि भेज सकता है, परन्तु उसका वोट सिर्फ एक ही होता है।
महत्वपूर्ण प्रशनों, जैसे शान्ति एवं सुरक्षा से जुड़े मुद्दे, नये सदस्यों को प्रवेश और बजट निर्णय के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है।
महासभा का नियमित सत्र हर साल सितम्बर माह के तीसरे मंगलवार से शुरू होकर दिसम्बर के मध्य तक चलता है।
प्रत्येक नियमित सत्र की शुरुआत पर महासभा एक नये अध्यक्ष, 21 उपाध्यक्ष और महासभा की सात मुख्य समितियों के अध्यक्षों का चुनाव करती है।
नियमित सत्र के अलावा महासभा की सुरक्षा परिषद के आग्रह पर विशेष सत्र आयोजित किये जा सकते हैं।
सुरक्षा परिषद की संस्तुति पर अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति , नये देशों को सदस्यता , महासचिव की नियुक्ति , राष्ट्र संघ का बजट पारित करना आदि महासभा के कार्य हैं।
2. सुरक्षा परिषद्
यह संयुक्त राष्ट्र संघ का मुख्य अंग है और एक प्रकार से कार्यपालिका है।
संयुक्त राष्ट्र घोसड़ा पत्र के अनुसार अंतरास्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बनाए रखना सुरक्षा परिषद् की मुख्य जिमेवारी है। इसी कारणवस एक मुहावरे के रूप में इसे दुनिया का पुलिसमैन भी कहा गया है।
इसमें 15 सदस्य होते हैं ,जिनमें 5 स्थायी और 10 अस्थायी सदस्य हैं।
5 स्थायी सदस्य हैं : अमेरिका,रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन ।

अस्थायी सदस्यों का निर्वाचन महासभा अपने दो-तिहाई बहुमत से दो वर्षो के लिए करती है।
सुरक्षा परिषद् के प्रत्येक सदस्य का एक वोट होता है। प्रक्रिया संबंधी मामलों में निर्णय के लिए 15 में से 9 सदस्यों द्वारा सकारात्मक मतदान आवश्यक होता है, जिसमें पाँचों स्थायी सदस्य देशों का सकारात्मक मत आवश्यक होता है। सभी स्थायी सदस्यों की सहमति को महाशक्ति मतैक्य (Great Power Unanimity) कहते हैं।
नोट :- 1965 में सुरक्षा परिषद् की सदस्य संख्या को 11 से बढ़ाकर 15 किया गया और सभी महत्वपूर्ण विषयों पर निर्णय के लिए आवश्यक सहमति के मतों की संख्या को 7 से बढ़ाकर 9 कर दिया गया जिसमें पाँच स्थायी सदस्यों की सहमति वाला मत भी शामिल है।
यदि कोई स्थायी सदस्य किसी निर्णय से सहमत नहीं है, तो वह नकारात्मक मतदान करके अपने वीटो के अधिकार का उपयोग कर सकता है। इस दशा में 15 में 14 सदस्य देशों के समर्थन के बावजूद प्रस्ताव स्वीकृत नहीं होते हैं।
यदि कोई स्थायी सदस्य किसी निर्णय का समर्थन नहीं करता और उस निर्णय को रोकना भी नहीं चाहता है तो वह मतदान की प्रक्रिया के दौरान अनुपस्थित रह सकता है।
सोवियत संघ ने वीटो का उपयोग सबसे अधिक बार किया है।
अमेरिका ने वीटो का उपयोग सर्वप्रथम मार्च, 1971 ई. में रोडेशिया के प्रश्न पर किया था।
चीन ने सर्वप्रथम वीटो का प्रयोग अगस्त, 1972 ई. में बांग्लादेश के विश्व संस्था में प्रवेश के प्रश्न पर किया।
3. आर्थिक एवं सामाजिक परिषद्
वर्तमान में आर्थिक एवं सामाजिक परिषद् की सदस्य संख्या 54 है। (प्रारंभ में सदस्य संख्या 18 थी, 1966 ई. में संशोधन के बाद सदस्यों की संख्या 27 कर दी गयी, फिर 24 सितम्बर, 1973 के संशोधन के बाद इसकी सदस्य संख्या 54 कर दी गयी।)
इसके सदस्यों का कार्यकाल 3 वर्ष का होता है।
यह एक स्थायी संस्था है, परन्तु इसके एक-तिहाई सदस्य यानी 18 सदस्य प्रतिवर्ष पदमुक्त होते हैं, परन्तु अवकाश-ग्रहण करने वाला सदस्य पुनः निर्वाचित हो सकता है।
परिषद् में प्रत्येक सदस्य राज्य का एक ही प्रतिनिधि होता है। इसमें निर्णय साधारण बहुमत से होता है।
आर्थिक एवं सामाजिक परिषद् की बैठकें वर्ष में दो बार होती हैं ……अप्रैल में न्यूयॉर्क में तथा जुलाई में जेनेवा में।
परिषद् अपना कार्य विभिन्न प्रकार के आयोगों, स्थायी समितियों तथा विशेष संस्थाओं के माध्यम से पूरा करती है। कुछ आयोग के नाम हैं …..1. आर्थिक और रोजगार आयोग 2. जनसंख्या और यातायात आयोग 3. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF)
4. प्रन्यास परिषद्
संयुक्त राष्ट्र संघ ने राष्ट्र संघ की मैण्डेट व्यवस्था के स्थान पर न्यास पद्धति को ग्रहण किया और उसके संचालन के लिए न्यास समिति का निर्माण किया।
न्यास पद्धति का मूल सिद्धान्त यह है कि इस समय कुछ पिछड़े हुए अल्पविकसित और आदिम दशा वाले प्रदेशों के निवासी इस योग्य नहीं हैं कि वे अपने देश का शासन स्वयं कर सकें। इन्हें दूसरे विकसित देश की सहायता अपेक्षित है। विकसित देशों का यह दायित्व है कि वे उनके विकास में पूरी सहायता दें और जब तक ये अपना शासन करने में समर्थ नहीं हो जाते, तब तक इनके हितों की देखभाल न्यास या अमानत (Trust) समझते हुए करे, इनका अपने स्वार्थ के लिए शोषण न करें।
जिन राष्ट्रों को न्यास का भार सौंपा गया है, ऐसे राज्य हैं :- ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, अमेरिका और ब्रिटेन।
रूस, चीन एवं फ्रांस सुरक्षा परिषद् के ऐसे स्थायी सदस्य देश हैं, जिनके शासन में कोई न्यास-क्षेत्र नहीं है।
प्रन्यास परिषद् में वर्तमान में 12 सदस्य हैं, जिनमें चार प्रबन्धकर्ता देश, तीन सुरक्षा परिषद् के स्थायी सदस्य होने के कारण स्थायी सदस्य और पाँच निर्वार्चित सदस्य हैं।
नवम्बर, 1994 में अमेरिका द्वारा प्रशासित प्रशांत द्वीप पलाऊ के स्वतंत्र होने के साथ ही प्रन्यास परिषद् के कार्य लगभग समाप्त हो गये हैं।
5. सचिवालय
सचिवालय, जिसे संयुक्त राष्ट्र का कार्यालय कहते हैं, इसके दिन-प्रतिदिन के कामों को निपटाता है।
इसका मुख्यालय न्यूयार्क में स्थित है।
सचिवालय का प्रमुख महासचिव होता है, जिसे महासभा द्वारा सुरक्षा परिषद् की सिफारिश पर 5 वर्ष की अवधि के लिए नियुक्त किया जाता है। महासचिव को दुबारा भी नियुक्त किया जा सकता है।
घोषणा-पत्र के अनुसार महासचिव संगठन का मुख्य प्रशासनिक अधिकारी होता है।
वर्तमान में जनवरी, 2017 से पुर्तगाल के अंतोनियो गुतरेस संयुक्त राष्ट्र संघ के नये महासचिव हैं।
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव
| क्र. | नाम | कार्यकाल | विवरण |
|---|---|---|---|
| 1. | त्रिग्वेली ( नॉर्वे ) | फरवरी ,1946 से नवम्बर , 1952 तक | नवम्बर , 1952 में स्वयं पद से इस्तीफा दिया |
| 2. | डेग हैमरसोल्ड (स्वीडेन ) | अप्रैल , 1953 से सितम्बर , 1961 तक | सितम्बर , 1961 में अफ्रीका में हवाई दुर्धटना में मृत्यु |
| 3. | यू थांट ( म्यांमार ) | नवम्बर , 1961 से दिसम्बर , 1971 तक | नवम्बर , 1961 में कार्यवाहक व 1962 में महासचिव बने। |
| 4. | कुर्त बाल्दीहीम ( आस्ट्रिया ) | जनवरी ,1972 से दिसम्बर ,1981 तक | लगातार दो कार्यकाल पूरा किये। |
| 5. | जेवियर पेरेज द कुइयार ( पेरू ) | जनवरी , 1982 से दिसम्बर , 1991 तक | लगातार दो कार्यकाल पूरा किये। |
| 6. | बुतरस बुतरस घाली ( मिस्र ) | जनवरी ,1992 से दिसम्बर , 1996 तक | एक कार्यकाल पूरा किये। |
| 7. | कोफी अन्नान ( घाना ) | जनवरी , 1997 से दिसम्बर , 2006 तक | लगातार दो कार्यकाल पूरा किये। |
| 8. | बान की-मून ( द . कोरिया ) | जनवरी , 2007 से दिसम्बर , 2016 तक | लगातार दो कार्यकाल पूरा किये। |
| 9. | अंतोनियो गुतरेस (पुर्तगाल ) | 1 जनवरी ,2017 से 31 दिसम्बर , 2026 तक | लगातार दूसरे कार्यकाल हेतू नियुक्त |
6. अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय
अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय की स्थापना , हेग (नीदरलैंड ) में 3 अप्रैल , 1946 ई. को की गई थी।
अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय की संविधि में पाँच अध्याय तथा 70 अनुच्छेद हैं।
इसमें न्यायाधीशों की संख्या 15 रखी गयी है। इनकी नियुक्ति 9 वर्षों के लिए होती है। प्रत्येक 3 वर्ष बाद 5 न्यायाधीश अवकाश ग्रहण करते हैं। कोई भी दो न्यायाधीश एक ही देश के नहीं हो सकते हैं।
न्यायाधीश अपने में से ही एक अध्यक्ष तथा एक उपाध्यक्ष को तीन वर्ष के लिए चुनते हैं।
वर्तमान में अमेरिका के जॉन ई. डोनोगी अध्यक्ष एवं रूस के किरिल जिवोरगेन उपाध्यक्ष है।
न्यायालय की सरकारी भाषाएँ :- फ्रेंच तथा अंग्रेजी हैं।
न्यायालय का कोरम( कार्यवाही संचालन के लिए न्यायाधीशों की न्यूनतम संख्या ) 9 है।
अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में भारतीय न्यायाधीश एवं उनका कार्यकाल
| क्र. | नाम | कार्यकाल |
|---|---|---|
| 1. | बेनेगल रामाराव | 1952 -53 |
| 2. | नागेन्द्र सिंह | 1973 -88 |
| 3. | रघुनंदन पाठक | 1989-91 |
| 4. | दलबीर भंडारी | 2012 से 2026 तक |
नोट :- नागेन्द्र सिंह – उपाध्यक्ष के रूप में कार्यकाल – 1976 -79 , अध्यक्ष के रूप में कार्यकाल -1985 -88