साम्राज्य में मुख्यमंत्री एवं पुरोहित की नियुक्ति के पूर्व इनके चरित्र को काफी जांचा-परखा जाता था, जिसे उपधा परीक्षण कहा जाता था।
सम्राट की सहायता के लिए एक मंत्रिपरिषद होती थी जिसमें सदस्यों की संख्या 12 , 16 या 20 हुआ करती थी।
अर्थशास्त्र में शीर्षस्थ अधिकारी के रूप में तीर्थ का उल्लेख मिलता है, जिसे महामात्र भी कहा जाता था। इसकी संख्या 18 थी।
अर्थशास्त्र में वर्णित तीर्थ :-
| 1. | मंत्री | प्रधानमंत्री |
| 2. | पुरोहित | धर्म एवं दान विभाग का प्रधान |
| 3. | सेनापति | सैन्य विभाग का प्रधान |
| 4. | युवराज | राजपुत्र |
| 5. | दाैवारिक | राजकीय द्वार-रक्षक |
| 6. | अंतर्वेदिक | अन्तःपुर का अध्यक्ष |
| 7. | समाहर्ता | आय का संग्रहकर्ता |
| 8. | सन्निधाता | राजकीय कोषाध्यक्ष |
| 9. | प्रशास्ता | कारागार का अध्यक्ष |
| 10. | प्रदेष्ट्रि | कमिश्नर |
| 11. | पौर | नगर का कोतवाल |
| 12. | व्यवहारिक | प्रमुख न्यायाधीश |
| 13. | नायक | नगर-रक्षा का अध्यक्ष |
| 14. | कर्मान्तिक | उद्योगों एवं कारखानों का अध्यक्ष |
| 15. | मंत्रिपरिषद | अध्यक्ष |
| 16. | दण्डपाल | सेना का सामान एकत्र करनेवाला |
| 17. | दुर्गपाल | दुर्ग-रक्षक |
| 18. | अन्तपाल | सीमावर्ती दुर्गों का रक्षक |
अर्थशास्त्र में चर, जासूस को कहा गया है।
अशोक के समय मौर्य साम्राज्य में प्रांतों की संख्या 5 थी। प्रांतों को चक्र कहा जाता था। प्रांतों के प्रशासक कुमार या आर्यपुत्र या राष्ट्रिक कहलाते थे।
| S.N. | मौर्य प्रांत | राजधानी |
|---|---|---|
| 1. | उत्तरापथ | तक्षशिला |
| 2. | अवन्ति राष्ट्र | उज्जयिनी |
| 3. | कलिंग | तोसली |
| 4. | दक्षिणापथ | सुवर्णागिरि |
| 5. | प्राशी (पूर्वी प्रांत) | पाटलिपुत्र |
प्रांतों का विभाजन विषय में किया गया था , जो विषयपति के अधीन होते थे।
प्रशासन की सबसे छोटी इकाई ग्राम थी , जिसका मुखिया ग्रामिक कहलाता था।
प्रशासकों में सबसे छोटा गोप था ,जो दस ग्रामों का शासन संभालता था।
मेगास्थनीज के अनुसार नगर का प्रशासन 30 सदस्यों का एक मंडल करता था, जो 6 समितियों में विभाजित था। प्रत्येक समिति में 5 सदस्य होते थे।
प्रशासनिक समिति एवं उसके कार्य :-
| समिति | कार्य |
|---|---|
| प्रथम | उद्योग एवं शिल्प कार्य का निरिक्षण |
| द्वितीय | विदेशियों की देखरेख |
| तृतीय | जन्म-मरण का विवरण रखना |
| चतुर्थ | व्यापार एवं वाणिज्य की देखभाल |
| पंचम | निर्मित वस्तुओं के विक्रय का निरीक्षण |
| षष्ठ | विक्री कर वसूल करना |
बिक्री कर के रूप में मूल्य का 10वां भाग वसूला जाता था , इसे बचाने वालों को मृत्युदंड दिया जाता था।
मेगास्थनीज के अनुसार एग्रोनोमाई मार्ग निर्माण अधिकारी था।
जस्टिन नामक यूनानी लेखक के अनुसार , चन्द्रगुप्त ने अपनी 6 लाख की फ़ौज से सारे भारत को रौंद दिया। यह बात सही भी हो सकती है और नहीं भी , लेकिन यह सही है कि चन्द्रगुप्त ने पश्चिमोत्तर भारत को सेल्यूकस की गुलामी से मुक्त किया।
जस्टिन के अनुसार चन्द्रगुप्त मौर्य की सेना में लगभग 50,000 अश्वारोही सैनिक , 9,000 हाथी और 8,000 रथ थे।
जस्टिन ने चन्द्रगुप्त की सेना को लुटेरों की सेना कहा है।
युद्ध-क्षेत्र में सेना का नेतृत्व करनेवाला अधिकारी नायक कहलाता था।
सैन्य विभाग का सबसे बड़ा अधिकारी सेनापति होता था।
प्लिनी नामक यूनानी लेखक के अनुसार चन्द्रगुप्त की सेना में 6,00,000 पैदल सिपाही 30,000 घुड़सवार और 9,000 हाथी थे।
मेगास्थनीज के अनुसार मौर्य सेना का रख-रखाव 5 सदस्यीय , छः समितियाँ करती थी।
सैन्य समिति एवं उनके कार्य :-
| समिति | कार्य |
|---|---|
| प्रथम | जलसेना की व्यवस्था |
| द्वितीय | यातायात एवं रसद की व्यवस्था |
| तृतीय | पैदल सैनिकों की देख-रेख |
| चतुर्थ | अश्वारोहियों की सेना की देख – रेख |
| पंचम | गजसेना की देख-रेख |
| षष्ठ | रथसेना की देख-रेख |
मौर्य प्रशासन में गुप्तचर विभाग महामात्य सर्प नामक अमात्य के अधीन था। अर्थशास्त्र में गुप्तचर को गूढ़ पुरुष कहा गया है तथा एक ही स्थान पर रहकर कार्य करने वाले गुप्तचर को संस्था कहा जाता था। एक स्थान से दूसरे स्थान पर भ्रमण करके कार्य करनेवाले गुप्तचर को संचार कहा जाता था।
अशोक के समय जनपदीय न्यायालय के न्यायाधीश को राजुक कहा जाता था।
सरकारी भूमि को सीता भूमि कहा जाता था। बिना वर्षा के अच्छी खेती होनेवाली भूमि को अदेवमातृक कहा जाता था।
मौर्य काल में द्रोण अनाज के माप के लिए प्रयोग होता था।
मेगास्थनीज ने भारतीय समाज को सात वर्गों में विभाजित किया है। 1. दार्शनिक 2. किसान 3. अहीर 4. कारीगर 5. सैनिक 6. निरीक्षक 7. सभासद।
स्वतंत्र वेश्यावृति को अपनाने वाली महिला रूपाजीवा कहलाती थी।
नन्द वंश के विनाश करने में चन्द्रगुप्त मौर्य ने कश्मीर के राजा पर्वतक से सहायता प्राप्त की थी।
मौर्या शासन 137 वर्षों तक रहा। भागवत पुराण के अनुसार मौर्य वंश में दस राजा हुए जबकि वायु पुराण के अनुसार नौ राजा हुए।
मौर्य वंश का अंतिम शासक बृहद्रथ था। इसकी हत्या इसके सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने 185 ईसा पूर्व में कर दी और मगध पर शुंग वंश की नींव डाली।
नोट :- अशोकाराम विहार पाटलिपुत्र में था।