सिंधु नदी तंत्र का सामान्य परिचय
- सिंधु नदी भारत की ऐतिहासिक और बहुत ही प्राचीन नदी है। विश्व की प्राचीनतम सभ्यताओं में से एक सिंधु घाटी की सभ्यता , सिंधु और उसके सहायक नदियों के किनारे ही पनपी थी।
- सिंधु नदी तंत्र , सिंधु नदी और उसकी सभी सहायक नदियों से मिलकर बनता है।
- सिंधु नदी तंत्र में निम्न नदियाँ आती है :- सिंधु , झेलम , चेनाब , रावी , व्यास , सतलज , श्योक , गिलगित , काबुल , कुर्रम , गोमल आदि।

- सिंधु नदी तंत्र की ज्यादातर नदियाँ हिमालय क्षेत्र से और कुछ नदियाँ हिंदूकुश पर्वत से निकलती है।
- सिंधु और उसकी ज्यादातर सहायक नदियाँ ग्लेशियर से जल प्राप्त करती हैं इसलिए इन नदियों में वर्ष भर जल रहता है अर्थात ये नदियाँ वर्ष वाहिनी हैं।
- सिंधु नदी तंत्र 11.65 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। भारत में इसका क्षेत्रफल लगभग 3.21 लाख वर्ग किलोमीटर है।
- सिंधु नदी तंत्र का अपवाह क्षेत्र तिब्बत (चीन) , भारत , पाकिस्तान और अफगानिस्तान में फैला हुआ है।
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सिंधु नदी (Sindhu River)
- सिंधु नदी तिब्बत में मानसरोवर झील के पास कैलाश पर्वत श्रृंखला पर स्थित बोखर-चू नामक ग्लेशियर से निकलती है। तिब्बत में इस ग्लेशियर को ‘सिंघी खंबन’ या ‘शेर का मुँह’ के नाम से जाना जाता है।
Note :- तिब्बत में मानसरोवर झील और कैलाश पर्वत स्थित है। तिब्बत में मानसरोवर झील के पास से तीन पूर्ववर्ती नदियों – सिंधु , सतलज और ब्रह्मपुत्र का उद्गम होता है। मानसरोवर झील के पास स्थित राक्षस / राकस ताल झील से सतलज नदी का , मानसरोवर झील के पश्चिम में कैलाश पर्वत श्रृंखला में स्थित बोखर-चू हिमनद (ग्लेशियर) से सिंधु नदी का और मानसरोवर के पूर्व में स्थित कैलाश पर्वत श्रृंखला के चेमायुंगडुंग ग्लेशियर से ब्रह्मपुत्र नदी का उद्गम होता है।

- सिंधु नदी चीन (तिब्बत क्षेत्र) , भारत और पाकिस्तान में बहते हुए ,अरब सागर में,डेल्टा बनाते हुए जल गिराती है।
- सिंधु नदी की कुल लंबाई 3180 किलोमीटर है, जिसमें चीन में 90 किलोमीटर, भारत में 1114 किलोमीटर तथा पाकिस्तान 1976 किलोमीटर है।
- सिंधु नदी सबसे अधिक पाकिस्तान में तथा सबसे कम चीन में बहती है।
- भारत में, सिंधु नदी दमचौक नामक स्थान से प्रवेश करती है और चिल्लास नामक स्थान से बाहर निकलती है।
- सिंधु नदी भारत में कोई मैदान का निर्माण नहीं करती हैं , क्योंकी यह पहाड़ी भागों से होकर गुजरती हैं।
- यह नदी अटक (पाकिस्तान) के नजदीक मैदानी भागों में प्रवेश करती है।
- यह नंगा पर्वत के उत्तरी भाग से घूम कर यह दक्षिण पश्चिम से पाकिस्तान में प्रवेश करती है।
- सिंधु नदी एक पूर्ववर्ती नदी हैं इसका इतिहास हिमालय से भी पुराना है यानी की सिंधु नदी हिमालय पर्वत के निर्माण से पहले से बह रही है।
- सिंधु नदी तंत्र का मुहाना करांची के निकट अरब सागर है, जहाँ सिंधु नदी डेल्टा बनाते हुए अरब सागर में गिर जाती है।कारांची शहर सिंधु नदी के दाहिने तट पर अवस्थित है।
- विश्व की प्राचीन नगरीय सभ्यता सिंधु घाटी सभ्यता इसी नदी के आस-पास के क्षेत्रों में फली -फुली थी।
- सिंधु नदी चापाकार डेल्टा का निर्माण करती है, जिसका विस्तार पाकिस्तान के सिंध प्रांत के दक्षिण हिस्से में और भारत के कच्छ क्षेत्र में है।
सिंधु नदी की सहायक नदियां :-
सिंधु नदी की सहायक नदियों को हम दो भागों में बाँट सकते हैं :-

सिंधु नदी में बाएँ ओर से मिलने वाली नदियां :-
झेलम नदी :-
उद्गम :- झेलम नदी कश्मीर घाटी के दक्षिण पूर्वी भाग में पीर पंजाल पर्वत श्रृंखला की पदस्थली में स्थित बेरीनाग झील से बेरीनाग झरने के रूप में निकलती है। बेरीनाग झील का पानी बेरीनाग झरने के रूप में शेषनाग झील में गिरता है और शेषनाग झील से झेलम नदी प्रारंभ होती है।
उत्तर -पश्चिम दिशा में प्रवाहित होते हुए वुलर झील से होकर निकलती है, वुलर झील जम्मू कश्मीर में स्थित भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील है।
जम्मू कश्मीर की राजधानी श्रीनगर झेलम नदी के किनारे स्थित है।
आगे चलकर झेलम नदी पाक अधिकृत काश्मीर की राजधानी मुजफ्फराबाद के पास से दक्षिण की ओर मुड जाती है और कुछ दुरी तक भारत पाकिस्तान की सीमा निर्धारित करती है।
झेलम नदी का प्राचीन नाम वितस्ता है।
झेलम नदी की सबसे प्रमुख सहायक नदी किशनगंगा नदी है। जिसे नीलम नदी भी कहा जाता है। किशनगंगा नदी पर ही किशनगंगा परियोजना स्थित है।
झेलम नदी पाकिस्तान में झंग नामक स्थान पर चिनाब नदी से मिल जाती है।
यह कश्मीर की सबसे महत्वपूर्ण नदी है। जम्मू कश्मीर में झेलम नदी पर तुलबुल और उरी परियोजनाएं चल रही हैं।
चेनाब नदी :-
चेनाब नदी का प्राचीन नाम अस्कनी है। यह सिंधु नदी की सबसे बड़ी सहायक नदी है, जो सिंधु नदी में बाएं तरफ से आकर मिलती है।
उद्गम :- चेनाब नदी हिमाचल प्रदेश में जास्कर श्रेणी के लाहुल स्पीति खंड के बड़ालाचला दर्रे के पास से दो शाखाओं चंद्र और भागा के रूप में निकलती हैं। चंद्र नदी चंद्र ताल से और भागा नदी सूर्य ताल से निकलती है। चंद्र और भागा का संगम तांडी हिमाचल प्रदेश में होता है। इसलिए चेनाब नदी को चंद्रभागा के नाम से भी जाना जाता है।
चेनाब नदी (पंचनद)सिंधु नदी से पाकिस्तान मिथानकोट नामक स्थान पर मिलती है।
झेलम , रावी और सतलज आदि चेनाब की सहायक नदियां है। चेनाब नदी पर सलाल , बगलिहार और दुलहस्ती , रतले आदि प्रमुख जल विद्युत परियोजनाएं स्थापित की गई हैं।
विश्व का सबसे ऊँचा रेल ब्रिज चिनाब नदी पर जम्मू कश्मीर राज्य रियासी जिले में बनाया गया है।
रावी नदी :-
रावी नदी का प्राचीन नाम पुरुषणी है। यह चेनाब नदी की एक सहायक नदी है।
उद्गम :- रावी नदी हिमाचल प्रदेश (कांगड़ा जिले ) की कुल्लू पहाड़ियों में रोहतांग दर्रे के पास से निकलती है। इसी दर्रे के पास व्यास कुंड से व्यास नदी निकलती है।
रावी नदी हिमाचल प्रदेश की चंबा घाटी में बहती है।
रावी नदी पीर पंजाल श्रेणी और धौलाधार श्रेणी के मध्य प्रवाहित होती है तथा धौलाधार श्रेणी को उत्तर से दक्षिण की ओर काटते हुए महाखड्ड (गॉर्ज) का निर्माण करती है।
पंजाब में रावी नदी मैदानी भाग में प्रवेश करती है और कुछ दुरी तक भारत-पाक सीमा के साथ-साथ बहती है।
पंजाब के पठानकोट जिले में रावी नदी पर थीन बांध (रंजीत सागर बांध) परियोजना स्थित हैं।
रावी नदी पाकिस्तान में सराय सिंधु के निकट चेनाब नदी से मिल जाती है।
व्यास नदी :-
व्यास नदी का प्राचीन नाम विपासा है। यह सतलज नदी की सहायक नदी है।
उद्गम :- व्यास नदी का उद्गम हिमाचल प्रदेश की कुल्लू पहाड़ी में स्थित रोहतांग दर्रे के दक्षिण किनारे पर स्थित व्यास कुंड से होता है।
पंजाब में हरिके नामक स्थान पर व्यास नदी सतलज नदी से मिलती है। पंजाब के कपूरथला में हरिके नामक स्थान पर व्यास और सतलज के संगम पर हरिके बैराज बांध बनाया गया है। इसी बैराज से इंदिरा गाँधी नहर का उद्गम होता है जो भारत की सबसे लम्बी नहर है।

हरिके बांध के पीछे हरिके नामक कृत्रिम झील का निर्माण होता है जो कि एक रामसर आद्रभूमि है।
व्यास नदी की सहायक नदियां बैन , बाणगंगा, लूनी और उहल हैं।
पंचनद में से व्यास नदी का सम्पूर्ण प्रवाह भारत में ही है।
व्यास नदी में Indus Dolphins पाई जाती हैं। जो पूरे भारत में सिर्फ व्यास नदी में ही पाई जाती है और किसी नदी में नहीं मिलती हैं।
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में व्यास नदी पर पोंग डैम बनाया गया है जिसे व्यास बांध भी कहा जाता है।
सतलज नदी :-
सतलज नदी का प्राचीन नाम शतुद्री है। यह चेनाब की सबसे लंबी सहायक नदी है।
उद्गम :- सतलज नदी तिब्बत की मानसरोवर झील के पास स्थित राकस / राक्षस ताल झील से निकलती है। यह एक पूर्वर्ती नदी है।
सतलज नदी शिपकिला दर्रे द्वारा भारत में प्रवेश करती हैं।
सतलज नदी पर भाखड़ा नांगल परियोजना चल रही है। इस परियोजना के तहत हिमाचल प्रदेश में भाखड़ा बांध और पंजाब में नांगल बांध बनाया गया है। भाखड़ा बांध के पीछे गोविन्द सागर झील का निर्माण होता है जो हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में स्थित है।
हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में सतलज नदी पर स्थित भाखड़ा बांध विश्व का सबसे ऊँचा गुरुत्वी बांध है।
नाथपा झाकरी परियोजना , कोल डैम परियोजना , सरहिंद परियोजना सतलज नदी पर स्थित है।
व्यास नदी सतलज की सहायक नदी है जो पंजाब के हरिके नामक स्थान पर सतलज नदी में मिलती है।
इसका अंत पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त के झंग जिले में त्रिम्मू नामक स्थान पर चिनाब नदी में मिलने के बाद हो जाता है।
| क्रम संख्या | नदीयों के नाम | उद्गम स्थान | में शामिल/मिलतीहै/गिरती है /मुहाना | सहायक नदियाँ |
|---|---|---|---|---|
| 1. | सिंधु | तिब्बत में मानसरोवर झील के पास बोखर-चु नामक ग्लेशियर | अरब सागर | श्योक , काबुल , चिनाब , कुर्रम , गिलगित |
| 2. | झेलम | बेरीनाग(काश्मीर) के समीप शेषनाग झील से | चेनाब नदी में (पाकिस्तान) | किशनगंगा नदी , कुन्हार नदी, पोहुरु नदी , अरपल नदी, पुंछ नदी , सुखनाग नदी, अरपठ नदी |
| 3. | चेनाब | बड़ालाचला दर्रे के पास से दो शाखाओं चंद्र और भागा के रूप में निकलती है | सिंधु नदी में (मिठानकोट) | मियार नाला , सोहल ,थिरोट , भूट नाला , मरुसूदर |
| 4. | रावी | कांगड़ा जिला (हि. प्र.) रोहतांग दर्रे के समीप | चिनाब नदी | बैरा-स्यूल नदी , बुधिल, बैरा , नाई |
| 5. | व्यास | रोहतांग दर्रे के समीप व्यास कुंड से | हरिके(कपूरथला) के समीप सतलज नदी में | फोजल , सर्वरी , सैज , पार्वती , पतलीकूहल |
| 6. | सतलज | तिब्बत में मानसरोवर झील के समीप राकस ताल से | चिनाब नदी में | बासपा, स्पीती , नोगली खड्ड , स्वां |
पंचनद क्या है ?
पंजाब (भारत और पाकिस्तान दोनों के पंजाब ) में बहने वाली पांच नदियों के समूह को पंचनद कहा जाता है। इन्हीं पांच नदियों के क्षेत्र को पंजाब कहा गया क्योंकि पंजाबी भाषा में पांच को पंज कहते हैं। पंजाब की सबसे प्रमुख नदी चेनाब नदी है। पंचनद चेनाब और उसकी सहायक नदियों झेलम, रावी , व्यास और सतलज के समूह को कहते हैं। पंचनद सिंधु नदी से पाकिस्तान के मिथानकोट नामक स्थान पर मिलता है पंचनद का क्षेत्र कृषि की दृष्टि से बहुत ही उपजाऊ क्षेत्र है।
सिंधु नदी के दांए ओर से मिलने वाली सहायक नदियां :-
श्योक नदी :-
उद्गम :- श्योक नदी रेमो ग्लेशियर से निकलती है।
रेमो ग्लेशियर काराकोरम श्रेणी पर सियाचिन ग्लेशियर के दाएं ओर स्थित है।
रेमो ग्लेशियर को सियाचिन की जीभ कहते है।
नुब्रा नदी और गलवान नदी , श्योक नदी की सहायक नदी है , नुब्रा नदी सियाचिन ग्लेशियर से निकलती है।
काबुल नदी :-
काबुल नदी अफगानिस्तान में हिन्दुकुश पर्वत के संगलाख श्रृंखला से निकलती है।
काबुल नदी पाकिस्तान के अटक नामक शहर के पास सिंधु नदी से मिल जाती है।
काबुल नदी पूर्वी अफगानिस्तान की मुख्य नदी है।
अफगानिस्तान की राजधानी काबुल , काबुल नदी के तट पर स्थित है।
स्वात नदी और कुनार नदी काबुल नदी की सहायक नदियां है।
स्वात नदी घाटी को पाकिस्तान का स्वर्ग कहा जाता है।
गिलगित नदी :-
गिलगित नदी पाक अधिकृत कश्मीर में स्थित संदूर लेक से निकलती है।
गिलगित नदी को गिजर नदी के नाम से भी जानते है।
गोमल नदी :-
गोमल नदी अफगानिस्तान में स्थित कोहनाक पर्वत से निकलती है।
सिंधु नदी जल समझौता :-
सिंधु नदी तंत्र के पानी के प्रयोग को लेकर भारत और पाकिस्तान के मध्य एक अग्रीमेंट साइन किया गया है जिसे हम सिंधु जल समझौता के नाम से जानते हैं। इस समझौते पर 19 सितंबर 1960 को भारत के प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति आयूब खान एवं विश्व बैंक के डब्लू. ए. बी. इलिफ ने पाकिस्तान के करांची में साइन किया था। इस समझौते को करवाने में विश्व बैंक ने भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता की थी।
इस समझौते के तहत सिंधु नदी तंत्र की 6 नदियों के जल को भारत और पाकिस्तान के बीच बांटा गया। इस समझौते के तहत सिंधु नदी की तीन पूर्वी सहायक नदियों रावी,व्यास , सतलज पर भारत को पूर्ण अधिकार दिया गया और पश्चिमी तीन नदियों सिंधु झेलम चिनाब पर पाकिस्तान को पूरा अधिकार दिया गया। इस समझौते के तहत, सिंधु जल आयोग का गठन किया गया था , इसकी बैठकें हर साल होती है।
