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सिंधु घाटी की सभ्यता (Indus Valley Civilization) Part-2 {AncHisL4ThP2}

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मिट्टी से बने हल का साक्ष्य मिला है।

सतलज नदी के तट पर पाया गया था।

खोज :- 1957

खोजकर्ता :- S.R. राव (रंगनाथ राव)

  • S.R. राव ने लोथल को लघु हड़प्पा या लघु मोहनजोदड़ो कहा है।

स्थिति :- अहमदाबाद जिले में (गुजरात) भोगावा नदी के किनारे।

गुजराती भाषा में लोथल का अर्थ होता है :- मृतकों का टीला

  • संयोगवश , मोहनजोदड़ो का अर्थ भी सिंधी भाषा में मृतकों का टीला होता है।

लोथल को अप्रैल 2014 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में नामित किया गया था और इसका आवेदन यूनेस्को की अस्थाई सूची में लंबित है।

यह अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का प्रमुख केंद्र था।

1. यह हड़प्पाकालीन एक मात्र बंदरगाह नगर था। यहाँ से कृत्रिम Dockyard (डॉकयार्ड / बंदरगाह / गोदीबाड़ी ) तथा Warehouse (गोदाम) के साक्ष्य मिले हैं। यह विश्व का सबसे पुराना ज्ञात बंदरगाह है।

2. यहाँ से नाव का साक्ष्य मिला है।

3. यहाँ से दिशा सूचक यंत्र मिला है।

4. यहाँ से फारस (मेसोपोटामिया) की मुहरें मिली है।

5. यहाँ से हाथी दाँत का पैमाना / स्केल मिला है।

6. यहाँ से सूतीवस्त्र का साक्ष्य मिला है।

7. यहाँ से काँसे और ताँबे के बने सूई का साक्ष्य मिला है।

8. यहाँ के घरों के दरवाजे मुख्य सड़क की ओर खुलते थे (सिंधु सभ्यता का एक मात्र शहर)।

9. यहाँ से चावल उपजाने के प्रथम प्रमाण (1800 ई0 पू0) मिले हैं।

10. यहाँ से अन्न पीसने की चक्की का साक्ष्य मिला है।

11. यहाँ से तीन युगल समाधियाँ / युगल शवाधान के साक्ष्य मिले हैं।

  • स्त्री पुरुष को एक साथ दफनाया गया है।

12. यहाँ से कछुए की हड्डियाँ मिली है।

13. यहाँ से अग्निवेदी (अग्निकुंड) के साक्ष्य मिले हैं।

14. यहाँ से एक चित्रित मृदभांड मिला है। जिस पर एक पेड़ के नीचे एक लोमड़ी और एक मछली दर्शाई गई है , जो पंचतंत्र की कहानी “चालाक लोमड़ी” की याद दिलाता है।

यह गुजरात के कक्ष जिले में स्थित है।

घोड़े के हड्डियों के अवशेष और एक अनोखी कब्रगाह मिली है।

कालीबंगन का अर्थ है काली चूड़ियाँ

जुते हुए खेत और नक्काशीदार ईंटों के प्रयोग का साक्ष्य प्राप्त हुआ है।

कालीबंगन एक मात्र हड़प्पाकालीन स्थल था, जिसका निचला शहर (समान्य लोगो के रहने हेतु) भी किले से घिरा हुआ था

यहाँ से अग्निपूजा की प्रथा के प्रमाण मिले हैं।

हड़प्पा की मोहरों पर सबसे अधिक एक श्रृंगी पशु का अंकन मिलता है। यहाँ से प्राप्त एक आयताकार मुहर में स्त्री के गर्भ से निकलता पौधा दिखाया गया है।

यहाँ से बड़ी संख्या में टेराकोटा के खिलौने मिले हैं।

मोहनजोदड़ो से नर्तकी की एक कांस्य मूर्ति मिली है।

सिंधु सभ्यता की सबसे बड़ी इमारत मोहनजोदड़ो का विशाल अन्न भंडार (अन्नागार) है।

यहाँ से विशाल स्नानागार की खुदाई की गई थी , जिसके मध्य स्थित स्नानकुंड 11.88 मीटर लम्बा , 7.01 मीटर चौड़ा एवं 2.43 मीटर गहरा है। इस स्नानकुंड में दो तरफ से उतरने के लिए सीढ़ियाँ बनाई गयी थी और चारो और कमरे बनाए गए थे। इसमें भरने के लिए पानी कुँए से निकाला जाता था। उपयोग के बाद उसे खाली कर दिया जाता था। वे शायद यहाँ विशिस्ट धार्मिक अनुष्ठानों के अवसरों पर स्नान किया करते थे।

यहाँ से एक शील पर तीन मुख वाले देवता / पशुपति नाथ की मूर्ति / पशुपति मुहर मिली है। उनके चारो ओर हाथी ,बाघ , गैंडा एवं भैंसा और पैरों के पास दो हिरण विराजमान हैं।

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