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मिश्रण एवं मिश्रण को अलग करने की विधियां {CheL1ThdP1}

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जब दो या दो से अधिक पदार्थों को किसी भी अनुपात में मिला दिया जाता है, तो उसे मिश्रण कहते है।

मिश्रण में उनके अवयवी तत्वों (मूल तत्वों) का गुण मौजूद होता है।

जैसे – हवा , बारूद , चीनी पानी का मिश्रण आदि।

कोल्डड्रिंक , फ़्रिजसोडा , लेमनसोडा , क्लब सोडा , द्रव में गैस का मिश्रण है।

मिश्रण दो प्रकार का होता है।

जिस मिश्रण के प्रत्येक भाग के सभी गुण एक समान होते हैं उसे समांगी मिश्रण कहते है।

जैसे – चीनी का नमक में विलयन , एल्कोहल तथा जल का मिश्रण।

जिस मिश्रण के प्रत्येक भाग के गुण एक समान नहीं होते उसे विषमांगी मिश्रण कहते हैं।

जैसे :- रेत तथा जल का मिश्रण , पेट्रोल तथा जल का मिश्रण , दूध।

रवाकरण (Crystallization) एक भौतिक परिवर्तन है।

इस विधि का उपयोग मुख्य रूप से कार्बनिक यौगिकों को शुद्ध करने के लिए किया जाता है , क्योंकि कार्बनिक यौगिकों की अक्सर विभिन्न विलायकों में अलग-अलग घुलनशीलता होती है। हालांकि, इस विधि का उपयोग अकार्बनिक यौगिकों को अलग करने के लिए भी किया जाता है , यदि उनके घुलनशीलता गुण भिन्न-भिन्न हो।

यह विधि तब उपयोगी होती है जब एक ठोस पदार्थ को उसके विलायक से अलग करना हो या जब एक मिश्रण में मौजूद विभिन्न ठोस पदार्थों को, जिनकी घुलनशीलता अलग-अलग हो, को अलग करना हो।

इस विधि में अशुद्ध ठोस मिश्रण को उचित विलायक के साथ मिलाकर गर्म किया जाता है और गर्म अवस्था में ही कीप द्वारा छान लिया जाता है। छानने के बाद विलयन को कम ताप पर धीरे-धीरे ठण्डा किया जाता है। ठण्डा होने पर शुद्ध पदार्थ क्रिस्टल के रूप में विलयन से अलग हो जाता है।

जैसे :-

  1. समुद्री पानी से नमक प्राप्त करना।
    • समुद्र के पानी को गर्म करने पर या सूर्य और हवा के द्वारा वाष्पित करने पर नमक के क्रिस्टल प्राप्त होते हैं।
  2. चीनी और नमक के मिश्रण से चीनी को अलग करना।
    • इसके लिए चीनी और नमक के मिश्रण को इथाइल अल्कोहल (C2H5OH) में डालकर घोलते हैं।
    • चीनी इथाइल अल्कोहल (C2H5OH) में घुलनशील होता है इसलिए घुल जाता है लेकिन आयनिक यौगिक (नमक) कार्बनिक विलायक (इथाइल अल्कोहल , बेंजीन) में घुलनशील नहीं होते हैं इसलिए नमक इथाइल अल्कोहल में नहीं घुल पाता है।
    • इस घोल को कीप द्वारा छानने पर नमक अलग हो जाता है।
    • फिर बचे हुए विलयन को धीमी आंच पर गर्म करने पर इथाइल अल्कोहल वाष्पित हो जाता है और चीनी क्रिस्टल के रूप में प्राप्त हो जाता है। {इथाइल अल्कोहल का बायलिंग पॉइंट लगभग 78.5°C होता है। जबकि चीनी उबलती नहीं है बल्कि लगभग 186°C पर जलने लगती है।}
  3. कॉपर सल्फेट के विलयन से कॉपर सल्फेट के क्रिस्टल प्राप्त करना।
  4. दूध से मक्खन को अलग करना।
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कॉपर सल्फेट के विलयन से कॉपर सल्फेट के क्रिस्टल प्राप्त करना।

किसी द्रव को वाष्पीकृत करके वाष्प को पुनः ठण्डा करके द्रव प्राप्त करने के प्रक्रम को आसवन कहते हैं।

आसवन (Distillation)

जैसे :-

  1. चीनी और जल के मिश्रण को अलग करना।
  2. समुद्री जल का शुद्धिकरण करना।
  3. आसुत जल तैयार करना।

ऐसे मिश्रण जिनके संघटक के क्वथनांकों में कम से कम अंतर होता है उसका पृथक्करण करने के लिए प्रभाजी आसवन विधि का प्रयोग करते है।

प्रभाजी आसवन / Fractional Distillation

जैसे :-

  1. भूगर्भ से निकाले गये पेट्रोलियम के विभिन्न संघटकों जैसे – पेट्रोल , केरोसिन ,डीजल आदि को इसी विधि से पृथक करते है।

इस विधि से उन कार्बनिक पदार्थों का शुद्धिकरण किया जाता है जो की जल में अविलेय होते है , परन्तु गर्म करने पर वाष्पित होते है और प्रायः अपने क्वथनांक पर अपघटित हो जाते है या उच्च ताप पर खराब हो जाते हैं।

इस विधि में गर्म करने के लिए आग का नहीं बल्कि पानी के भाप का उपयोग किया जाता है ताकि पदार्थ को अपेक्षाकृत कम तापमान पर वाष्पित किया जा सके।

जैसे :- मेथिल एल्कोहल , एसीटोन , एथिल एल्कोहल , आवश्यक तेलों , इत्र एवं पौधों के अर्क निकालने में।

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निस्पंदन एक भौतिक पृथक्करण प्रक्रिया है, जो एक फिल्टर पेपर का उपयोग करके ठोस पदार्थ और तरल पदार्थ के मिश्रण को अलग करती है।

जैसे :-

  1. रेत और पानी को अलग करना।
  2. गंदे जल से साफ जल प्राप्त करना।
  3. चाय के पत्तियों से चाय को अलग करना।
  4. खनन में कीमती धातुओं को निकालने के लिए बेल्ट फ़िल्टर।
  5. HEPA फ़िल्टर-एक प्रकार का यांत्रिक वायु फ़िल्टर।

यह अनाज के बीजों के सुरक्षात्मक आवरण (भूसा) और डंठल से बीजों को अलग करने की प्रक्रिया है।

इस विधि में कटी हुई फसल को लाठी से पीटकर या जानवरों का उपयोग करके उसे रौंदकर या थ्रेशिंग मशीनों का उपयोग करके फसल के डंठल से अनाज को अलग किया जाता है।

इस विधि का उपयोग मिश्रण के भारी और हल्के घटकों को या अनाज के दानों को भूसे से अलग करने के लिए किया जाता है।

इस प्रक्रिया में, अनाज के दानों को भूसे से अलग करने के लिए हवा का उपयोग किया जाता है, जहाँ हल्के भूसे के कण हवा के साथ उड़ जाते हैं और भारी अनाज के दाने निचे गिर जाते हैं।

निष्पावन (winnowing)

इस विधि में गेहूँ और चावल से पत्थरों के छोटे-छोटे टुकड़ों जैसे अवांछनीय पदार्थों को हाथ से चुनकर अलग किया जाता है।

इस विधि के द्वारा अनाज से पत्थरों , डंठल और भूसी के टुकड़ो को निकाला जाता है, जो कि थ्रेशिंग और निष्पावन के बाद भी अनाज के साथ रह जाते हैं।

इस विधि का उपयोग मैदा या आटा से अशुद्धियों को निकालने के लिए किया जाता है। मैदा या आटा के महीन कण छलनी के छिद्रों से गुजर जाते हैं जबकि बड़ी अशुद्धियाँ छलनी पर रह जाती है।

जब पंकिल जल को कुछ समय के लिए बिना हिलाए छोड़ दिया जाता है तो भारी अशुद्धियाँ जैसे की मिट्टी , निचे बैठ जाती है , जिससे जल ऊपर से साफ हो जाता है। इसे ही अवसादन कहते हैं।

इस साफ जल को निस्तारण करके / निथारकर (साफ जल को धीरे-धीरे दूसरे बर्तन में डालकर) अलग किया जा सकता है।

इस विधि द्वारा ठोस और तरल या दो तरल पदार्थों को अलग किया जाता है जब वे दोनों एक दूसरे में घुलनशील न हो।

जैसे :- पानी और रेत को अलग करना , तेल और पानी को अलग करना , चावल को पानी में धोने के बाद पानी को धीरे-धीरे दूसरे बर्तन में डालकर चावल को अलग करना।

इस प्रक्रिया के द्वारा चुंबकीय गुण वाले पदार्थ और गैर चुंबकीय गुण वाले पदार्थ के मिश्रण को चुंबक की सहायता से अलग किया जाता है।

जैसे :- लोहा और रेत के मिश्रण को अलग करना।

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