भारतीय संविधान की प्रस्तावना संविधान का एक संक्षिप्त और महत्वपूर्ण भाग है। यह संविधान के उद्देश्यों सिद्धांतों और आदर्शों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत करता है , और यह बताता है कि संविधान को जनता द्वारा क्यों और कैसे अपनाया गया।
नेहरू द्वारा प्रस्तुत उद्देश्य संकल्प में जो आदर्श प्रस्तुत किया गया,उन्हें ही संविधान की उद्देशिका में शामिल कर लिया गया।
संविधान की प्रस्तावना को ‘संविधान की कुंजी ‘ कहा जाता है।
प्रस्तावना संविधान का आरंभिक अंग /भाग होते हुए भी कानूनी तौर पर उसका भाग नहीं माना जाता है। आदर्श अदालते प्रस्तावना में दिए गए विचारों को लागु नहीं कर सकती है।
प्रस्तावना के अनुसार संविधान के अधीन समस्त शक्तियों का केंद्रबिंदु अथवा स्रोत ‘भारत के लोग ‘ ही है।
प्रस्तावना में लिखित शब्द यथा – “हम भारत के लोग ……………… इस संविधान को ” अंगीकृत अधिनियमित और आत्मार्पित करते है। भारतीय लोगों की सर्वोच्च सम्प्रभुता का उद्घोष करते है।
प्रस्तावना में “हम भारत के लोग” शब्द UN चार्टर (UNO का कानून ) से लिया गया है।
प्रस्तावना को न्यायालय में प्रवर्तित नहीं किया जा सकता। यानी यदि सरकार या कोई नागरिक प्रस्तावना को अवहेलना करता है तो उसकी रक्षा के लिए हम अदालत की सहायता नहीं ले सकते है।
सर्वोच्च न्यायालय ने प्रस्तावना को संविधान का अंग/भाग माना है।
संसद प्रस्तावना में संशोधन कर सकती है।
42 वें संविधान संशोधन अधिनियम 1976 ई० के द्वारा इसमें समाजवादी ,पंथनिरपेक्ष (धर्मनिरपेक्ष) और राष्ट्र की अखण्डता शब्द जोड़े गये।
भारत के संविधान की प्रस्तावना में तीन प्रकार का न्याय (सामाजिक , आर्थिक एवं राजनैतिक) , पांच प्रकार की स्वतंत्रता (विचार , अभिव्यक्ति ,विश्वास , धर्म एवं उपासना) एवं दो प्रकार की समानता (प्रतिष्ठा एवं अवसर) का उल्लेख किया गया है।
भारत का संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित एवं सर्वाधिक व्यापक संविधान है। यह अंशतः कठोर और अंशतः लचीला है
प्रस्तावना में संविधान को अंगीकृत , अधिनियमित और आत्मसमर्पित करने की तिथि (26 नवंबर 1949) का भी उल्लेख है।
नोट :- लिखित संविधान की अवधारणा अमेरिका की देन है।
विश्व में प्रथम लिखित संविधान अमेरिका का है। (1787)
विश्व का सबसे संक्षिप्त संविधान अमेरिका का है। इसमें केवल 7 अनुच्छेद है।
विश्व का सबसे कठोर संविधान अमेरिका का है।
किन देशों के पास लिखित संविधान नहीं है। :- ब्रिटेन , इजराइल , कनाडा , सऊदीअरब और न्यूजीलैंड।
भारतीय राजनैतिक व्यवस्था में संविधान सर्वोच्च है।
भारत का संविधान अपना प्राधिकार भारत की जनता से प्राप्त करता है।
भारत सरकार अधिनियम 1935 वह संवैधानिक दस्तावेज है जिसका भारतीय संविधान तैयार करने में गहरा प्रभाव पड़ा।
भारत के संविधान में संघीय शासन शब्द का प्रयोग कहीं भी नहीं किया गया है। संविधान में भारत को राज्यों का संघ घोषित किया गया है।