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परमाणु संरचना और सिद्धान्त : थॉमसन, डाल्टन तथा रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल (Atomic Structure & Theory) {CheL2ThaP1}

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परमाणु (Atom)

तत्व के सूक्ष्मतम कण को परमाणु कहते हैं।

परमाणु गोले के सामान होता है, जिसकी त्रिज्या 10-10 मीटर होती है।

परमाणु अस्थायी होता है और यह रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेता है।

परमाणु के बारे में विस्तृत अध्ययन के लिए वैज्ञानिकों ने निम्नलिखित सिद्धांत दिए हैं।

  1. डाल्टन का परमाणु सिद्धांत (Dalton’s Atomic Theory)
  2. थॉमसन का परमाणु सिद्धांत (Thomson’s Atomic Theory)
  3. रदरफोर्ड का नाभिकीय सिद्धांत (Rutherford’s Nuclear Theory)
  4. बोर-बरी मॉडल (Bohr-Bury model)
  5. ऑफबाउ सिद्धांत (Aufbau Principle)

इस परमाणु सिद्धांत का प्रतिपादन अंग्रेजी भौतिक विज्ञानी और रसायनज्ञ जॉन डाल्टन ने 1808 ईo में किया था।

डाल्टन के परमाणु सिद्धांत :-

  • सभी पदार्थ छोटे और अविभाज्य कणों से बने होते हैं , जिन्हें परमाणु कहते हैं।
  • परमाणुओं को छोटे-छोटे कणों में विभाजित नहीं किया जा सकता है।
  • रासायनिक अभिक्रिया द्वारा परमाणुओं को न तो बनाया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है।
  • किसी विशिष्ट तत्व के सभी परमाणु द्रव्यमान , आकार और अन्य गुणों में समान होते हैं तथा अलग-अलग तत्वों के परमाणु अलग-अलग द्रव्यमान , आकार वाले होते हैं और अन्य गुणों में भी अलग-अलग होते हैं।
  • विभिन्न तत्वों के परमाणु हमेशा सरल पूर्ण संख्या अनुपात में संयोजित होकर रासायनिक यौगिक बनाते हैं।
  • रासायनिक अभिक्रिया में परमाणु आपस में जुड़ते हैं , अलग होते हैं या पुनर्व्यवस्थित होते हैं , लेकिन वे कभी नष्ट नहीं होते हैं।
  1. परमाणुओं का विभाज्य होना :- डाल्टन ने कहा था परमाणुओं को छोटे-छोटे कणों में विभाजित नहीं किया जा सकता है जबकि डाल्टन के बाद वैज्ञानिकों ने पाया की परमाणु विभाजित होते हैं और इन्हें इलेक्ट्रॉन , प्रोट्रॉन और न्यूट्रॉन जैसे छोटे-छोटे उप-परमाण्विक कणों में विभाजित किया जा सकता है।
  2. एक तत्व के परमाणुओं का समान न होना :- डाल्टन ने कहा था , किसी विशिष्ट तत्व के सभी परमाणुओं के द्रव्यमान आपस में समान होते हैं जबकि किसी एक तत्व के सभी समस्थानिकों के द्रव्यमान आपस में समान नहीं होते हैं बल्कि अलग अलग होते हैं।

सन 1891-1897 तक के अपने प्रयोगों द्वारा 1898 में जेo – जेo थॉमसन ने यह मॉडल प्रस्तुत किया था।

सिद्धांत :- थॉमसन के अनुसार , परमाणु एक धनावेशित गोला ( त्रिज्या = 10-10 m लगभग ) है , जिसमें इलेक्ट्रॉन इस प्रकार धंसे होते हैं कि इससे एक स्थिर व स्थायी वैद्युत व्यवस्था प्राप्त हो जाती है।

  • इनके अनुसार परमाणु , एक तरबूज के समान होता है जिसका लाल वाला भाग धनावेशित होता है तथा उतने ही आवेश के इलेक्ट्रॉन तरबूज के बीज की तरह चारो तरफ धंसे होते हैं।
  • इस मॉडल को इलेक्ट्रॉन के खोज के तुरंत बाद और परमाणु नाभिक की खोज के पहले तैयार किया गया था।
  • इस मॉडल को Plum-Pudding Model , रेजिन- पुडिंग मॉडल और तरबूज मॉडल के नाम से भी जाना जाता है।
  • इस सिद्धांत के अनुसार परमाणु का द्रव्यमान पुरे परमाणु पर समान रूप से बँटा हुआ होता है।
थॉमसन का परमाणु मॉडल (Thomson's Atomic Model)

जेo – जेo थॉमसन को सन 1906 में गैसों की विद्युत चालकता पर सैद्धांतिक व प्रायोगिक जाँच के लिए” भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

  1. थॉमसन के परमाणु मॉडल के द्वारा रदरफोर्ड के α-प्रकीर्णन प्रयोग की व्याख्या नहीं की जा सकती है।
  2. इस परमाणु मॉडल के द्वारा हाइड्रोजन के स्पेक्ट्रम की व्याख्या नहीं की जा सकती है।
  3. यह परमाणु मॉडल परमाणु के स्थायित्व की व्याख्या नहीं कर पाता है।
  4. इस परमाणु मॉडल में नाभिक का कोई उल्लेख नहीं है।
  5. इस परमाणु मॉडल के आधार पर यह व्याख्या नहीं किया जा सकता है कि धनात्मक आवेश (प्रोट्रॉन) और ऋणात्मक आवेश (इलेक्ट्रॉन) किस प्रकार जुड़े हुए है।
  6. इस परमाणु मॉडल के अनुसार परमाणु का पूरा द्रव्यमान पूरे परमाणु में समान रूप से वितरित होता है , जो की गलत है और रदरफोर्ड के परमाणु सिद्धांत से मेल नहीं खाता है।
  7. यह मॉडल न्यूट्रॉन के बारे में कोई जानकारी नहीं देता है क्योंकि न्यूट्रॉन की खोज बाद में हुई थी।

रदरफोर्ड का नाभिकीय सिद्धांत :-

  • इनके अनुसार परमाणु विभाज्य है और कई सूक्ष्मकणों से मिलकर बना है। परमाणु में इलेक्ट्रॉन , प्रोट्रॉन और न्यूट्रॉन मुख्य रूप से पाये जाते हैं। इलेक्ट्रॉन , प्रोट्रॉन और न्यूट्रॉन को मौलिक कण कहते हैं।
  • परमाणु के मध्य में एक नाभिक होता है , जिसमें प्रोट्रॉन तथा न्यूट्रॉन होता है। प्रोट्रॉन तथा न्यूट्रॉन को सम्मिलित रूप से न्यूक्लिऑन (Nucleon) कहते है।
  • नाभिक के चारो ओर इलेक्ट्रॉन चक्कर लगाता है। जिस पथ पर इलेक्ट्रॉन चक्कर लगाता है , उस पथ को कक्षा कहते हैं।
  • किसी परमाणु का सम्पूर्ण द्रव्यमान उसके केन्द्र (नाभिक) में होता है।
  • परमाणु में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा हमेशा ऋणात्मक होती है।
  • परमाणु की ऊर्जा हमेशा नियत रहती है।
रदरफोर्ड का नाभिकीय सिद्धांत (Rutherford’s Nuclear Theory)

रदरफोर्ड ने सोने के पतले पत्तर पर α-कणों से आघात कराया जिससे उन्हें निम्नलिखित जानकारियाँ मिली।

रदरफोर्ड का नाभिकीय सिद्धांत (Rutherford’s Nuclear Theory)
  1. कुछ α-किरण सोने के पतले पत्तर से सीधे पार कर गए। इससे यह स्पष्ट हुआ कि परमाणु के अंदर खाली स्थान होता है
  2. कुछ α-किरण परमाणु के मध्यवर्ती वाले भाग से अपनी दिशा से विचलित हो गए। इससे यह स्पष्ट हुआ कि परमाणु के मध्यवर्ती वाले भाग में कोई धनावेश वाला कण है।
  3. कुछ α-किरण परमाणु के मध्यवर्ती वाले भाग से टकराकर अपनी ही दिशा में वापस लौट गये। इससे यह स्पष्ट हुआ कि परमाणु के मध्यवर्ती वाले भाग में भारी द्रव्यमान वाला कण है। इस प्रकार रदरफोर्ड ने परमाणु के मध्यवर्ती वाले भाग का नाम नाभिक रखा और कहा की परमाणु का सम्पूर्ण द्रव्यमान उसके नाभिक में होता है।

परमाणु की त्रिज्या = 10-10 m = 1 Å / 1 Angstrom

नाभिक की त्रिज्या = 10-15 m = 1 Fermimeter / Femtometer

परमाणु की त्रिज्या तथा नाभिक की त्रिज्या में अंतर = 105 m

परमाणु / Atom
मूल कणचिन्हआवेश (कूलम्ब)सापेक्ष आवेशद्रव्यमान (Kg)लगभग द्रव्यमानखोजकर्ताखोजने का समय (ईo)
इलेक्ट्रॉनe-1.6022×10-19-19.109×10-310जे. जे. थॉमसन
(ब्रिटिश)
1897
प्रोट्रॉनp+1.6022×10-19+11.672×10-271गोल्डस्टीन (जर्मन)1886
न्यूट्रॉनn001.675×10-271जेम्स चैडविक (ब्रिटिश)1932

Note :- गोल्डस्टीन ने 1886 में ही डिस्चार्ज ट्यूब प्रयोग में एनोड किरणों के रूप में धनात्मक कणों (प्रोट्रॉन) की खोज की थी। रदरफोर्ड ने 1919 में इन कणों को अन्य परमाणुओं के नाभिक में पहचाना और 1920 में इसे प्रोट्रॉन नाम दिया

इलेक्ट्रॉन , प्रोट्रॉन और न्यूट्रॉन (electron , proton and neutron )

इलेक्ट्रॉन को कैथोड किरण भी कहते है।

प्रोट्रॉन को एनोड किरण भी कहते है।

इलेक्ट्रॉन तथा प्रोट्रॉन पर आवेश का मान बराबर होता है लेकिन एक दूसरे के विपरित दिशा में।

इलेक्ट्रॉन , प्रोट्रॉन तथा न्यूट्रॉन में इलेक्ट्रॉन सबसे हल्का मौलिक कण है , जबकि न्यूट्रॉन सबसे भारी मौलिक कण है।

भेदन क्षमता :- n > p > e

प्रोट्रॉन स्थायी कण है , जबकि न्यूट्रॉन एवं इलेक्ट्रॉन अस्थायी कण है।

इसका खोज पाउली ने किया था।

यह आवेशहीन तथा द्रव्यमानहीन कण है।

इसका खोज एण्डरसन ने किया था।

इसे इलेक्ट्रॉन का प्रतिकण कहा जाता है।

जब इलेक्ट्रॉन और पॉजीट्रॉन एक दूसरे की ओर गति करते हैं तो वे परस्पर मिलकर एक दूसरे का विनाश कर देते हैं।

इसका द्रव्यमान इलेक्ट्रॉन के बराबर तथा आवेश इलेक्ट्रॉन के बराबर एवं विपरीत होता है।

  • द्रव्यमान :- 9.109×10-31 Kg
  • आवेश :- +1.6022×10-19 C

इसका खोज युकावा ने किया था।

इस कण का नाम भारतीय वैज्ञानिक सत्येन्द्र नाथ बोस के नाम पर रखा गया है।

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