कक्षा या शेल (Orbit or Shell)
नाभिक के चारो तरफ के वृत्ताकार पथ (जिसपर इलेक्ट्रॉन नाभिक का चक्कर लगाते हैं।) को कक्षा (Orbit) या शेल (Shell) कहते हैं।
इसकी संख्या 7 है।
प्रत्येक कक्षा को क्रमशः K , L , M , N , O , P , Q अक्षरों के द्वारा सूचित किया जाता है। नाभिक के सबसे नजदीक वाली कक्षा को K अक्षर के द्वारा सूचित किया जाता है।

अन्दर से बाहर की तरफ आने पर कक्षा की ऊर्जा बढ़ती जाती है।
- ऊर्जा का क्रम ➞ K < L < M < N < O < P < Q
बोर-बरी मॉडल
नियम :- 1 ➞ बोर-बरी मॉडल के अनुसार प्रत्येक कक्षा में चक्कर लगाने वाले इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम संख्या = 2n2 हो सकती है। जहाँ n कक्षा की संख्या है।
| कक्षा की संख्या और उसका नाम | अधिकतम e– की संख्या |
|---|---|
| n = 1 ➞ K | 2 x (1)2 = 2 |
| n = 2 ➞ L | 2 x (2)2 = 8 |
| n = 3 ➞ M | 2 x (3)2 = 18 |
| n = 4 ➞ N | 2 x (4)2 = 32 |
| n = 5 ➞ O | 2 x (5)2 = 50 |
| n = 6 ➞ P | 2 x (6)2 = 72 |
| n = 7 ➞ Q | 2 x (7)2 = 98 |
नियम :- 2 ➞ यदि कोई इलेक्ट्रॉन अपनी निश्चित कक्षा में रहकर नाभिक के चारो ओर चक्कर लगा रहा हो तो उसकी ऊर्जा में कोई परिवर्तन नहीं होता है।
नियम :- 3 ➞ यदि कोई इलेक्ट्रॉन अपने नाभिक के नजदीक वाली कक्षा से दूर वाली कक्षा में जाना चाहता हो तो वह ऊर्जा ग्रहण करेगा।
नियम :- 4 ➞ यदि कोई इलेक्ट्रॉन अपने नाभिक के दूर वाली कक्षा से नजदीक वाली कक्षा में आना चाहता हो तो वह ऊर्जा का त्याग करेगा।
उपकक्षा (Subshell or Sub Orbit)
प्रत्येक कक्षा के अंदर कई उपकक्षाएँ भी होती है जिन्हें s , p , d , f अक्षरों द्वारा सूचित किया जाता है।
उपकक्षाओं की खोज सोमर फिल्ड ने किया था।

s उपकक्षा :-
इसका आकार गोला के समान होता है।
p उपकक्षा :-
इसका आकार डमरू के समान होता है।
d उपकक्षा :-
इसका आकार डबल डमरू के समान होता है।
f उपकक्षा :-
इसका आकार 5 भुजाओं वाले डमरू के समान होता है।
| उपकक्षा | इलेक्ट्रॉन की संख्या |
|---|---|
| s | 2 |
| p | 6 |
| d | 10 |
| f | 14 |
उदाहरण :-
| कक्षा | उपकक्षा | प्रत्येक उपकक्षा में उपस्थित इलेक्ट्रॉन |
|---|---|---|
| K = 2 | s | 2 |
| L = 8 | s , p | 2 , 6 |
| M = 18 | s , p , d | 2 , 6 , 10 |
| N = 32 | s , p , d , f | 2 , 6 , 10 , 14 |
कक्षक (Orbits)
कक्षा के भीतर इलेक्ट्रॉन के पाए जाने की संभावना वाले त्रिविमीय क्षेत्र को कक्षक कहते हैं। एक कक्षा के भीतर एक या एक से अधिक कक्षक हो सकते हैं।
Note :- कक्षा एक निश्चित वृताकार पथ है जिस पर इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारो ओर घूमते हैं , जबकि कक्षक वह त्रिविमीय क्षेत्र है जहाँ इलेक्ट्रॉन के पाए जाने की संभावना सबसे अधिक होती है। अर्थात कक्षा एक नियत पथ है और कक्षक एक संभावना वाला क्षेत्र है।
कक्षक की संख्या उपकक्षा में इलेक्ट्रॉनों की संख्या की आधी होती है।
एक कक्षक में अधिकतम दो इलेक्ट्रॉन हो सकते हैं।
कक्षक में इलेक्ट्रॉन हुंड के नियम के अनुसार भरे जाते हैं।
हुंड का नियम :- प्रत्येक कक्षक में पहले एक-एक करके इलेक्ट्रॉन प्रवेश करते हैं। उसके बाद विपरीत चक्रण में इलेक्ट्रॉनों का जोड़ा बनना प्रारंभ होता है।

